उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो…
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए…
छपरा, सारण…
ईद—खुशियों का त्योहार…
लेकिन इस बार छपरा में तस्वीर कुछ और ही है…
न कोई रौनक…
न कोई जश्न…
बस ग़म… खामोशी… और संजीदगी…
शिया समाज के बीच यह खबर फैलने के बाद कि
अयातुल्ला अली खामनेई का निधन हो गया है…
पूरे देश के साथ-साथ छपरा में भी शोक का माहौल बन गया…
⚠️ हालांकि इस खबर की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है…
लेकिन इसका असर लोगों की भावनाओं में साफ़ देखा जा रहा है…
छपरा में शिया समाज के लोगों ने—
👉 काली पट्टी बांधकर नमाज़ अदा की…
👉 ईद का जश्न नहीं मनाया…
👉 और पूरे दिन सादगी में बिताया…
जिस तरह किसी घर में शोक के समय जश्न नहीं होता…
उसी तरह इस बार पूरे समाज ने ईद की खुशियों से दूरी बना ली…
सैयद काजिम राजा रिजवी कहते हैं—
“अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है…
लेकिन यह हमारे लिए बहुत बड़ा ग़म है…
इसलिए हमने जश्न नहीं मनाया…”
सैयद इयावर इमाम का कहना है—
“हमारे रहबर की खबर से पूरा विश्व ग़मजदा है…
ईरान हमेशा सच के साथ खड़ा रहा है…”
यह सिर्फ एक खबर नहीं है…
यह उस जुड़ाव की कहानी है…
जहाँ एक रहबर के लिए…
पूरा समाज अपने त्योहार की खुशियाँ भी छोड़ देता है…
ईद का चाँद तो निकला…
लेकिन छपरा में इस बार…
खुशियाँ नहीं…
सिर्फ ग़म नजर आया…
छपरा से ग्राउंड रिपोर्ट…
संज़ीव मिश्रा… eBihar Digital News


