मध्य-पूर्व की राजनीति एक बार फिर दुनिया के केंद्र में है। ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता Ali Khamenei की मौत की खबरों के बाद कई देशों में प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इसी कड़ी में बिहार के Chapra में शिया समाज और स्थानीय लोगों ने कैंडल मार्च निकालकर श्रद्धांजलि दी और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर अपनी राय रखी।
कैंडल मार्च के दौरान लोगों ने कहा कि खामनेई उनके धर्मगुरु और रहबर थे और उन्होंने अपने अनुयायियों को एक रास्ता दिखाया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान “हिंदुस्तान जिंदाबाद” और “इंकलाब आएगा” जैसे नारे भी लगाए गए।
स्थानीय इमाम ने कहा कि खामनेई को उनके अनुयायी शहीद मानते हैं और उनकी याद में यह मार्च निकाला गया है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में हो रहे संघर्ष में निर्दोष लोगों की जान जा रही है, जो मानवता के लिए चिंता का विषय है।
अगर इतिहास की बात करें तो भारत और Iran के रिश्ते सदियों पुराने हैं। यह संबंध व्यापार, संस्कृति और इतिहास से जुड़े रहे हैं। Mughal Empire के दौर में फारसी भाषा भारत के दरबारों में प्रमुख थी और दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक संबंध काफी मजबूत रहे।
अगर इतिहास की बात करें तो भारत और Iran के रिश्ते सदियों पुराने हैं। यह संबंध व्यापार, संस्कृति और इतिहास से जुड़े रहे हैं। Mughal Empire के दौर में फारसी भाषा भारत के दरबारों में प्रमुख थी और दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक संबंध काफी मजबूत रहे।

आज भी ईरान भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश माना जाता है। ऊर्जा, व्यापार और मध्य एशिया तक पहुंच के कारण दोनों देशों के बीच संबंध अहम रहे हैं।
हालांकि मध्य-पूर्व की राजनीति में कई बड़ी ताकतों की भूमिका भी चर्चा में रहती है। United States और Israel की नीतियों को लेकर अक्सर बहस होती रही है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र के तेल संसाधन और वैश्विक अर्थव्यवस्था भी इस क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित करते हैं।

कैंडल मार्च में शामिल महिलाओं ने भी अपनी राय रखी। तसलीमा फातिमा और अन्य महिलाओं ने कहा कि उनके अनुसार खामनेई उनके धार्मिक मार्गदर्शक थे और वे उनके विचारों का सम्मान करती हैं। उन्होंने कहा कि उनके बारे में कई तरह की बातें कही जा रही हैं, लेकिन वे उन्हें अपने रहबर के रूप में देखती हैं।
कार्यक्रम में शामिल समाज के लोगों ने यह भी कहा कि उनका विरोध और मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसका उद्देश्य केवल अपनी भावनाएं व्यक्त करना है।

दरअसल, मध्य-पूर्व में होने वाली घटनाओं का असर केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोग भी इन घटनाओं से भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं। छपरा में निकला यह कैंडल मार्च भी उसी वैश्विक घटनाक्रम की एक स्थानीय प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।


