ज़्यादा डराने वाला।
बच्चे अंधेरी रात में नहीं…
जंगल–झाड़ियों में नहीं…
बल्कि दोपहर के उजाले में गायब हो रहे हैं।

दोपहर — जब घर में सब जाग रहे होते हैं,
गलियाँ लोगों से भरी होती हैं,
बच्चे खेलते हैं और ज़िंदगी सामान्य लगती है…
उसी समय बच्चे रहस्यमय तरीके से ग़ायब।

दो बच्चों के गार्जियन आज टूटे हुए हैं,
लेकिन उनके शब्दों में पूरा छपरा कांप रहा है।
उनका कहना है —
“हमारे बच्चे बिना बताए कहीं नहीं जा सकते थे…
ना कोई झगड़ा, ना कोई नाराज़गी…
वो बस दोपहर में थे… और फिर अचानक नहीं थे।”

वो बस दोपहर में थे… और फिर अचानक नहीं थे।”
एफ़आईआर दर्ज है…
हालत जस का तस।
एक महीना बीत चुका है — लेकिन बच्चों का कोई सुराग नहीं।

अब सवाल उठते हैं —
क्या बच्चे कहीं चले गए?
या किसी ने उन्हें ले गया?
क्या Child Trafficking का रैकेट दोपहर में सक्रिय है?
या फिर मामला कुछ और है?
गार्जियन का दावा गंभीर है —
“हमारे बच्चे अकेले नहीं हैं…
और भी परिवार इस ज़िले में अपने लापता बच्चों की तलाश में भटक रहे हैं।”
तो क्या छपरा में किसी नेटवर्क की सक्रियता बढ़ी है?
क्या बच्चों के गायब होने का सिलसिला सिर्फ संयोग है?
या कहीं कोई संगठित खेल चल रहा है?

यह तो पुलिस की जाँच बताएगी…
लेकिन सच ये है —
मासूम लापता हैं, और दिन बीतते जा रहे हैं।
बच्चों की
📌 फोटो
📌 FIR कॉपी
📌 गार्जियन के संपर्क नंबर
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अगर आपको कोई भी जानकारी मिलती है —
कृपया मदद कीजिए।
क्योंकि सवाल अब सिर्फ दो बच्चों का नहीं…
सवाल है —
बच्चे दोपहर में कहाँ जा रहे हैं?
और क्यों?
