Wed. Feb 11th, 2026

बिहार…
जहाँ राजनीति सिर्फ सत्ता का खेल नहीं,
बल्कि सामाजिक इंजीनियरिंग का सबसे कठिन प्रयोग है।

और इसी प्रयोग को सबसे लंबा, सबसे जिद्दी और सबसे दिलचस्प तरीके से जिसने चलाया—
वह हैं नीतीश कुमार।
इंजीनियर से ‘सोशल इंजीनियर’ तक

1 मार्च 1951, बख्तियारपुर।
एक साधारण परिवार का लड़का,
जो इंजीनियर बनकर निकला…
लेकिन किस्मत उसे जनता के बीच ले आई।

पटना इंजीनियरिंग कॉलेज—आज का NIT पटना।
JP आंदोलन…
गिरफ़्तारी…
संघर्ष।

His political journey was not chosen… it was shaped by turbulence.”

सत्ता में वापसी—और बदलाव की शुरुआत 2005
बिहार हिंसा, अपराध और टूटे सिस्टम के बोझ से दबा था।

नीतीश कुमार लौटे—सिर्फ मुख्यमंत्री बनने नहीं, बिहार को री-डिज़ाइन करने।

सड़कें बनीं…
स्कूलों की मरम्मत हुई…
तेज़-ट्रैक कोर्ट आए…
हर गांव शहर में बिजली आई।
और लोगों ने पहली बार महसूस किया—
राज्य बदल सकता है।
जीविका—महिलाओं की शांत क्रांति

गाँवों में महिलाएँ कभी चौखट तक सीमित थीं।
नीतीश ने निर्णय लिया—
“बिहार तभी बदलेगा, जब महिलाएँ बदलेंगी।”

जीविका ने वही किया।
यह भारत की सबसे बड़ी महिला-समूह क्रांतियों में से एक बनी।

“A million silent revolutions—one woman at a time.”

दारू बंदी — एक विवादित लेकिन प्रभावशाली फैसला

2016 में एक फैसला आया, जिसने बिहार की सामाजिक संरचना को हिला दिया—
दारूबंदी।

यह लोकप्रिय फैसला नहीं था…
यह साहसिक था।

लेकिन इसका असर गहरा पड़ा
गाँवों में घरेलू हिंसा घटी।
महिलाओं की आर्थिक बचत बढ़ी।
घरों में झगड़े कम हुए।
और पहली बार, महिलाएँ खुलकर बोलीं—
“हमारे घर में शांति लौटी है।”

“A political gamble… that changed the social fabric of the state.”
चुनाव 2025 — 10,000 रुपये का ‘मास्टरस्ट्रोक’

और फिर…
चुनाव से ठीक पहले,
एक और निर्णय आया जिसने बिहार की राजनीति का नैरेटिव ही बदल दिया—

महिलाओं के खातों में 10,000 रुपये।

सरकार के मुताबिक यह सामाजिक-आर्थिक सहायता थी।
विपक्ष कहता है—चुनावी कार्ड।

लेकिन एक चीज़ साफ़ दिखी—
गाँव से लेकर शहर तक,
महिलाओं के बीच इसका सीधा राजनीतिक असर हुआ।
“For the first time, women were not just voters… they became decisive kingmakers.”

10वीं पारी — उनकी सबसे बड़ी परीक्षा
2025
नीतीश कुमार फिर सत्ता के दरवाज़े पर—10वीं बार।

लेकिन इस बार चुनौती सिर्फ शासन की नहीं…
विरासत की है।

युवा नई उम्मीदें चाहते हैं।
महिलाएँ अब निर्णायक शक्ति हैं।
अर्थव्यवस्था एक नए मॉडल की मांग कर रही है।
“If the past was about rebuilding Bihar,
this chapter is about safeguarding his legacy.”

अंत — “टाइगर की सबसे कठिन पारी”

नीतीश कुमार ने राजनीति में गिरावट भी देखी…
वापसी भी…
आलोचना भी…
और बड़े फैसले भी।

दारू बंदी से लेकर जीविका तक,
और 10,000 रुपये के ‘महिला मास्टरस्ट्रोक’ तक—
उनका हर कदम
बिहार की सामाजिक इंजीनियरिंग का एक हिस्सा है।

और अब…
जब वे 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने की ओर हैं—
एक बात फिर साफ़ है—

टाइगर अभी ज़िंदा है…
पर इस बार जंगल में मुकाबला सबसे कठिन है।

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