आज छपरा की हवा में कुछ अलग ही गूंज थी।
छपरा के DM अमन समीर—जो पूरे 2 साल 8 महीने इस जिले के चेहरे में बदलाव लाते रहे—आज स्थानांतरण के बाद विदा ले रहे थे।
और शहर का दृश्य… किसी सरकारी रूटीन जैसा बिल्कुल नहीं था।
DM साहब की गाड़ी आज दूल्हे की गाड़ी की तरह सजी हुई थी।
फूल, गुब्बारे, और लोगों की भीड़—
हर कोई बस एक आखिरी फोटो, एक धन्यवाद, एक याद लेकर लौटना चाहता था।

किसी ने कहा—
“साहब ने सड़कों को भी चलना सिखाया था…”
किसी ने कहा—
“काम ऐसे करते थे जैसे शहर उनका परिवार हो।”
2 साल 8 महीनों में
उन्होंने काम की जो परतें इस शहर पर चढ़ाईं
वो आज भी भीड़ की आवाज़ में दिखाई दे रही थीं।
उधर, इसी हलचल के बीच
छपरा को उसका 59वां जिलाधिकारी मिल गया—IAS वैभव श्रीवास्तव।
सादा अंदाज़ में DM ऑफिस पहुंचे, फाइलें संभालीं और
छपरा के लिए नए कामों की नई शुरुआत का संकेत दे दिया।

एक तरफ विदाई का शोर,
दूसरी तरफ स्वागत की दस्तक—
छपरा आज दो कहानियों के बीच खड़ा था।


