Sat. Feb 28th, 2026

छपरा के छपरा में मेथवलिया (मतवालिया) चौक पर हुई सड़क दुर्घटना अब सिर्फ एक खबर नहीं रही।
यह एक घर की पूरी कहानी है — जो अधूरी रह गई।
श्रवण कुमार राय उर्फ गुड्डू, उम्र मात्र 25 साल।
एक प्राइवेट पार्सल कंपनी में ड्राइवर थे। जिस चौक के पास उनका कार्यस्थल था, उसी के नजदीक सड़क पर उनकी जान चली गई। काम पर आए थे… रोज़ की तरह। लेकिन उस दिन घर लौटना नसीब नहीं हुआ।

बताया जा रहा है कि ड्यूटी के दौरान गाड़ी रोककर जैसे ही नीचे उतरे, तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। सदर अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
पीछे रह गए — तीन छोटे-छोटे मासूम बच्चे।
उम्र 25 साल… और तीन बच्चों का पिता।
सोचिए…

एक तरफ तीन बच्चों की मासूम आँखें,
दूसरी तरफ एक माँ की टूटी हुई दुनिया,
और बीच में एक सड़क… जो हर बार “तेज रफ्तार” कहकर आगे बढ़ जाती है।
यह जानकारी उनके साले मंटू कुमार ने दी।
घर में रोना-पीटना है। लेकिन उससे बड़ा सवाल है — अब क्या होगा?
तीन मासूमों की पढ़ाई?
उनकी परवरिश?
उनका भविष्य?

सड़क दुर्घटना की खबरें अक्सर एक पैराग्राफ में सिमट जाती हैं।
लेकिन जिनके घर में हादसा होता है, उनके लिए वह पूरी जिंदगी बन जाती है।
क्या प्रशासन रफ्तार पर लगाम लगाएगा?
क्या पीड़ित परिवार को मुआवजा और सहायता मिलेगी?
क्या उस वाहन का पता चलेगा जिसने एक पिता को छीन लिया?
या फिर यह भी एक और खबर बनकर रह जाएगी?
25 साल की उम्र में

तीन बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।
अब सवाल सिर्फ हादसे का नहीं है —
सवाल उन तीन मासूमों के भविष्य का है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *