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20 साल बाद लौटा था बेटा… लेकिन घर की कलह ने उसे मौत चुनने पर मजबूर कर दिया

🔸Disclaimer: यह खबर परिजनों (मां, बहन) की बातचीत पर आधारित है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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छपरा, सारण –एक बेहद मार्मिक और झकझोर देने वाला मामला सारण जिले के जखुआ गांव से सामने आया है। जहां 45 वर्षीय आनंद कुमार सिंह, जिन्होंने 20 साल जेल में काटने के बाद मात्र तीन महीने की पेरोल पर अपने घर वापसी की थी, ने बीती रात ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली।

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आनंद कुमार सिंह, जो सीआरपीएफ में जवान रह चुके थे, हत्या के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद पिछले दो दशकों से जेल में बंद थे। पेरोल पर घर लौटने के बाद जिस सुकून और अपनापन की उन्हें तलाश थी, वह उन्हें नहीं मिल पाया।

चार बहनों का इकलौता भाई और मां की आंखों का तारा, आनंद को लेकर उम्मीदें जिंदा थीं। एक मां जिसने 20 साल अपने बेटे के लौटने का इंतज़ार किया — वो मां आज बेटे की अर्थी को देख रही है।

परिजनों के अनुसार, आनंद की अपनी पत्नी सरिता देवी से लंबे समय से अनबन चल रही थी। पारिवारिक कलह अपने चरम पर थी। बीती रात उन्होंने कथित रूप से ज़हर खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

मृतक के पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें उन्होंने पत्नी और सास पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।

परिजन बताते हैं कि जेल से लौटने के बाद आनंद मानसिक रूप से टूटे हुए थे। उन्होंने अपने परिवार के साथ दोबारा जीवन शुरू करने की कोशिश की, लेकिन पारिवारिक विवादों और मानसिक तनाव ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया।

इस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच में जुटी है।

एक मां का 20 सालों का इंतजार,
चार बहनों का भाई के लिए जीता विश्वास,
और एक आदमी का टूटा हुआ मन,
सब खत्म हो गया — ज़हर की एक बोतल के साथ।

यह खबर मृतक की बहन सुचित्रा, मां और अन्य परिजनों के बयान पर आधारित है।

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