मकर के रहने वाले बृजेश सिंह, अपने ही परिवार की बारात में शामिल होने निकले थे। घर में खुशी थी, रौनक थी, रोशनी थी… लेकिन उसी रास्ते पर एक अनियंत्रित ट्रक ने इतनी जोरदार टक्कर मारी कि कुछ ही पलों में पूरी दुनिया बदल गई।

बारात का रास्ता, बारात का संगीत… और अचानक बीच सड़क पर पसरी खामोशी।
बृजेश सिंह की मौके पर ही मौत हो गई।
उनके साथ एक और व्यक्ति—गंभीर रूप से घायल—पटना पीएमसीएच रेफर।

जिन घरों में कल तक शादी की तैयारी थी, आज वहां सिर्फ मातम की शहनाई बज रही है।
दो छोटे-छोटे मासूम बच्चे, जो अभी दुनिया को समझना भी नहीं सीखे, अचानक अनाथ जैसे हो गए।
अब उनका सहारा कौन बनेगा? उनका भविष्य किसके भरोसे?

यह कोई पहली घटना नहीं है।
तेज रफ्तार ट्रक और वही सड़क जो बार-बार मौत देती है,
लेकिन प्रशासन हर बार सिर्फ “जांच होगी, कार्रवाई होगी” का बयान देता है।
पोस्टमार्टम अभी नहीं हुआ है।
FIR दर्ज हो रही है।
कागज़ों पर काम चल रहा है…
और ज़मीन पर एक परिवार बिखर गया है।

सवाल वही है—
क्यों हर बार सड़कें निर्दोषों का खून पी जाती हैं?
क्यों हर बार मौत तेज रफ्तार के नाम लिख दी जाती है?
और क्यों इस घटना के बाद भी कुछ बदलने वाला नहीं है?
