“यह भीड़ देख रहे हैं आप?
या उस उबलते ग़ुस्से को…
जो सारण में एक युवक की नृशंस हत्या के बाद सड़क पर उतर आया है।
कहते हैं हत्या सिर्फ एक वारदात नहीं होती…
एक पूरी बस्ती का सुकून छीन ले जाती है।”
सारण के रिविलगंज थाना क्षेत्र का जखुंआ गांव…
जहां एक 25 साल के युवक रोहित कुमार की लाश सुबह रेलवे ट्रैक किनारे मिली।
गला रेता हुआ… एक हाथ कटा हुआ…
जिस किसी ने भी यह दृश्य देखा, पैरों तले ज़मीन खिसक ग

रोहित, जो दूसरे राज्य में वेल्डिंग का काम करता था…
30 नवंबर को अपनी बहन की शादी में घर आया था।
किसे पता था कि वो घर से आखिरी बार निकलेगा।
रात को मोबाइल पर आए एक कॉल ने उसकी ज़िंदगी की आखिरी घंटी बजा दी।
सुबह जब ग्रामीणों ने शव देखा,
सन्नाटा पहले टूटा… फिर ग़ुस्सा सड़क पर उतर आया।
छपरा–सीवान मुख्य मार्ग जाम,
लोगों की भीड़… प्रशासन के खिलाफ नारे…
और बीच में खड़ा एक सवाल—
रोहित की हत्या किसने की और क्यों?”
पुलिस आई, अधिकारी पहुंचे,
जाम हट गया… लेकिन वो दर्द नहीं हटा
जो किसी परिवार की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल गया।

शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा चुका है
और पुलिस अब “सभी पहलुओं” पर जांच कर रही है।
लेकिन इस गांव की हवा में एक डर तैर रहा है—
क्या अगला नंबर किसका?”
eBihar Desk — न्यूज़ एनालिस्ट संजीव मिश्रा

