मंच पर जिला जज, तमाम न्यायिक पदाधिकारी, सारण के जिलाधिकारी और सारण के पुलिस अधीक्षक एक साथ मौजूद थे।
दीप प्रज्वलन के साथ लोक अदालत के कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई।
नज़ारा वही था, जिसकी उम्मीद थी।
भीड़ थी… लेकिन यह भीड़ किसी हंगामे की नहीं,
यह भीड़ थी न्याय की आस की।
लोग अपने-अपने मुकदमों के साथ आए थे, इस उम्मीद में कि शायद आज
तारीख नहीं, फैसला मिलेगा।

यह भीड़ बताती है कि
अब भी लोगों का न्यायपालिका पर भरोसा ज़िंदा है।
लोग चाहते हैं कि उनके मामले जल्द सुलझें,
ताकि ज़िंदगी फिर से पटरी पर लौट सके।
इस मौके पर जिला जज पुनीत कुमार गर्ग,
सारण के डीएम और एसपी ने लोगों को बताया कि
कौन-कौन से मामलों का निपटारा लोक अदालत के ज़रिए किया जा सकता है।

उन्होंने कहा—
लोक अदालत साल में चार बार,
हर क्वार्टर में एक बार लगती है।
आज का दिन एक सुनहरा मौका है—
अपने कानूनी झगड़ों से छुटकारा पाने का,
मानसिक तनाव कम करने का,
और कोर्ट-कचहरी के अंतहीन चक्करों से बाहर निकलने का।
लोक अदालत की सबसे बड़ी खासियत यही है—
यहाँ मामला हमेशा के लिए सुलझ जाता है।
फिर न अपील, न तारीख,
न वकीलों की भागदौड़।

शायद इसलिए कहा जाता है—
शांतिपूर्ण जीवन जीने का सबसे आसान रास्ता
लोक अदालत से होकर गुजरता है।

