eBiharDigitalNews

डिजिटल युग का डिजिटल समाचार

काग़ज़ों में किसान, ज़मीन पर सवाल

सरकार कहती है—एग्री स्टैक परियोजना।
किसान सुनता है—ई-केवाईसी, फार्मर रजिस्ट्री, शिविर।
06 से 09 दिसंबर तक सभी पंचायतों में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। उद्देश्य साफ बताया गया है—किसानों का ई-केवाईसी पूरा हो, फार्मर रजिस्ट्री में नाम दर्ज हो जाए। फाइलों में यह “तेज़ी” है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर सभी प्रखंडों में वरीय प्रभारी पदाधिकारी भेजे गए हैं। वे निरीक्षण कर रहे हैं—काग़ज़ पूरे हैं या नहीं, अपलोड हुआ या नहीं, लक्ष्य पूरा हुआ या नहीं।
ख़ुद जिलाधिकारी आपदा नियंत्रण कक्ष में बैठकर समीक्षा कर रहे हैं। स्क्रीन पर आंकड़े हैं, प्रतिशत है, प्रगति रिपोर्ट है।
लेकिन ज़रा ठहरिए।

क्या हर किसान को पता है कि फार्मर रजिस्ट्री क्या है?
क्या जिनके पास स्मार्टफ़ोन नहीं है, नेटवर्क नहीं है, वे भी इस “डिजिटल किसान” की सूची में आ पाएंगे?
क्या शिविर में बैठे ऑपरेटर के पास समय है किसान की बात सुनने का, या सिर्फ़ आधार नंबर भरना है?
सरकार की निगाह में किसान अब एक डेटा है—
जिसे जोड़ना है, सत्यापित करना है, और सिस्टम में फिट करना है।
पर सवाल यह है कि

क्या इस पूरी प्रक्रिया में किसान की सुविधा केंद्र में है,
या फिर लक्ष्य, रिपोर्ट और समीक्षा?
एग्री स्टैक अगर सच में किसानों के लिए है,
तो सिर्फ़ शिविर लगाने से नहीं,
किसान को समझाने, सुनने और भरोसा दिलाने से बनेगा।
बाक़ी,
फाइलें तो हर बार पूरी हो जाती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *