जदयू के वरिष्ठ नेता और पूर्व शिया वक्फ बोर्ड चेयरमैन सैयद अफ़ज़ल अब्बास ने अपने पैतृक आवास पर सैकड़ों गरीब, निसहाय और जरूरतमंद लोगों के बीच कंबल वितरण किया। ठंड जब हद से गुजर रही हो, तब कंबल सिर्फ़ ओढ़ने की चीज़ नहीं होता—वो रात काटने की उम्मीद बन जाता है।


भीषण ठंड ने गरीब और असहाय लोगों को बेबस कर रखा है। ऐसे में जब किसी के हाथ में कंबल पहुंचता है, तो चेहरे पर जो सुकून उतरता है—वो किसी नई जिंदगी मिलने जैसा होता है।
यहीं बात फिट बैठती है मशहूर शायर बशीर बद्र की ये पंक्तियां—
“दुआ करो कि सलामत रहे मेरी उम्मीद,
बहुत अजीब सहारा है ज़िंदगी के लिए।”
सैयद अफ़ज़ल अब्बास ने कहा कि ठंड के इस दौर में समाज के सक्षम लोगों को आगे आना चाहिए। यह कोई एहसान नहीं, बल्कि इंसान होने की ज़िम्मेदारी है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे सियासत नहीं, खालिस खिदमत बताया।
लल्लनटॉप भाषा में कहें तो—

जब सिस्टम ठंडा पड़ जाए, तब अगर कोई इंसानियत की रजाई लेकर आ जाए, तो वही असली नेता होता है।
धन्य हैं वो लोग, जिन्हें खुदा ने भेजा है—
ताकि ठंड से ठिठुरते इंसानों तक रहम की गर्माहट पहुंच सके।
सारण से खास रिपोर्ट | eBihar Digital News


