Tue. Feb 10th, 2026

बिहार की धरती पर आज सिर्फ एक शिवलिंग की स्थापना नहीं हुई है,
आज आस्था, संस्कृति और पर्यटन के एक नए युग की नींव रखी गई है।
पूर्वी चंपारण के कैथवलिया, मोतिहारी में बन रहे
विराट रामायण मंदिर परिसर में
विश्व का सबसे विशाल सहस्त्र लिंगम शिवलिंग आज स्थापित किया गया।
यह शिवलिंग बिहार में नहीं बना,

बल्कि तमिलनाडु के महाबलीपुरम से तराश कर यहां लाया गया है।
महाबलीपुरम — वही धरती,
जो सदियों से पत्थर की अद्भुत कलाकारी के लिए
पूरी दुनिया में प्रसिद्ध रही है।
एक ही विशाल ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित यह सहस्त्रलिंगम
करीब 33 फीट ऊंचा,
लगभग 33 फीट व्यास वाला
और 200 टन से अधिक वजनी है।
इस शिवलिंग को बिहार तक लाना
किसी चमत्कार से कम नहीं था।

किसी चमत्कार से कम नहीं था।
विशेष रूप से डिजाइन किए गए ट्रेलर
और भारी वाहनों के जरिए
करीब 2500 किलोमीटर की लंबी यात्रा तय की गई।
कई राज्यों से गुजरते हुए,
करीब 45 दिनों की कठिन यात्रा के बाद
यह शिवलिंग सुरक्षित रूप से मोतिहारी पहुंचा।
जहां-जहां से यह शिवलिंग गुजरा,
लोगों ने फूल बरसाए,
आरती उतारी

और भगवान भोलेनाथ का स्वागत किया।
आज इस ऐतिहासिक स्थापना समारोह में
खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार,
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी,
मंत्री, संत समाज
और हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।
धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि
यह सहस्त्र लिंगम
बिहार को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर
एक नई पहचान दिलाएगा।
अब सवाल है — यहां पहुंचा कैसे जाए?
मोतिहारी शहर से विराट रामायण मंदिर की दूरी
लगभग 10 से 12 किलोमीटर है।
मोतिहारी रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से
कैथवलिया के लिए
टैक्सी, ऑटो और निजी वाहन
आसानी से उपलब्ध हैं।

मोतिहारी से छपरा या रक्सौल मार्ग पर चलते हुए
कैथवलिया मोड़ से मंदिर तक
चौड़ी और पक्की सड़क विकसित की जा रही है।
भविष्य में यहां
विशाल पार्किंग
और आधुनिक पर्यटन सुविधाएं भी तैयार होंगी।
यह सिर्फ एक मंदिर नहीं है,
यह आने वाले समय में
बिहार की पहचान बनेगा।
आज भोले बाबा सिर्फ विराजमान नहीं हुए हैं,
आज उन्होंने बिहार को
दुनिया से जोड़ दिया है।
हर-हर महादेव।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *