बल्कि ज़मीन पर बदलाव की गारंटी दे रही है।
जी हां…
सात निश्चय के बाद अब सात निश्चय–3!
और इस बार सीधा फोकस है —
आम आदमी की ज़िंदगी को आसान बनाने पर।
नारा बिल्कुल साफ है —

“सबका सम्मान, जीवन आसान!”
सरकार ने साफ कह दिया है…
अब जनता को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे,
बल्कि अधिकारी जनता के सामने जवाबदेह होंगे।
हर सोमवार…
हर शुक्रवार…
अब दफ्तर बंद नहीं,
जनता के लिए खुलेंगे!
बीडीओ हों,
सीओ हों,
वीडीओ, सीडीपीओ
या फिर तमाम विभागों के अधिकारी —
सबको अनिवार्य रूप से दफ्तर में रहना होगा।
शिकायत सुनी जाएगी,
रजिस्टर में दर्ज होगी,
रसीद मिलेगी,
और कार्रवाई भी होगी!
और सुनिए…
दफ्तरों में अब कुर्सी होगी,
पानी होगा,

शौचालय होगा —
क्योंकि शिकायतकर्ता भी सम्मान का हकदार है।
अब बात मुख्यमंत्री की…
21 जनवरी!
सारण की धरती…
और बिहार के मुख्यमंत्री
नीतीश कुमार छपरा आ रहे हैं!
समृद्धि यात्रा के तहत
योजनाओं की समीक्षा होगी,
घोषणाओं पर जवाब लिया जाएगा,
और सीधे जनता से संवाद होगा।
सिलाई सेंटर का लोकार्पण,
बालक आईटीआई का उद्घाटन,
और कई योजनाओं की सौगात —
सब कुछ एक ही मंच से!

जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में
इन तमाम तैयारियों की पुष्टि कर दी है।
साफ है…
यह सिर्फ दौरा नहीं,
सिस्टम को जवाबदेह बनाने की कोशिश है।
सवाल बस एक है —
क्या अब वाकई
आम आदमी को मिलेगा सम्मान?
और क्या सच में
ज़िंदगी होगी आसान?
नज़र बनाए रखिए…
क्योंकि ये है
**सात निश्चय–



