यह वही राघोपुर है…
जहां सामने गंगा का पानी है, पीछे पुल दिखाई दे रहा है… और इसी इलाके से आई एक खबर ने पूरे बिहार को झकझोर दिया है।
जरा सोचिए… जिन बच्चों को घर से भोज खाने के लिए विदा किया गया होगा, उनके परिवारों को क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का सबसे दर्दनाक सफर बन जाएगा!
13 अक्टूबर की रात वैशाली के राघोपुर की रामपुर श्यामचंद पंचायत के पास नाव पलट गई। नाव पर सवार लोग नदी पार कर भोज खाने जा रहे थे। देखते ही देखते खुशियों का सफर मातम में बदल गया।
इस हादसे में कई मासूम बच्चों की जान चली गई। जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने शुरुआती तौर पर 13 मौतों की पुष्टि की। बाद की कुछ मीडिया रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 14 बताई गई है।

जब जिलाधिकारी वर्षा सिंह पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचीं, तो अपनों को खोने का दर्द आंसुओं के रूप में फूट पड़ा। परिजन उनसे लिपटकर रोने लगे। यह दृश्य देखकर जिलाधिकारी भी भावुक हो गईं।
लेकिन इस दर्दनाक हादसे के बाद एक बड़ा सवाल भी है—नदी पार करने वाले लोगों की सुरक्षा कितनी सुनिश्चित है? क्या नावों की क्षमता, उनकी स्थिति और सुरक्षा के इंतजामों की नियमित जांच होती है?
आज इन सवालों से ज्यादा जरूरी है उन परिवारों का दर्द समझना, जिन्होंने अपने मासूम बच्चों को खो दिया है।
राघोपुर की गंगा में सिर्फ एक नाव नहीं पलटी… कई परिवारों की खुशियां उजड़ गईं।
ईश्वर दिवंगत बच्चों की आत्मा को शांति दें और उनके परिवारों को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति दें।
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मैं हूं संजीव मिश्रा, eBihar DigitalNews।

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