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चलो बुलावा आया है… बाबा ने बुलाया है…

बाबा बर्फानी का नाम तो आपने सुना ही होगा…
वही अमरनाथ… जहां बर्फ की गुफा में खुद भगवान विराजमान होते हैं…
जहां पहुंचना आसान नहीं… लेकिन आस्था हो, तो रास्ते खुद बन जाते हैं।
अमरनाथ की यात्रा…
दुनिया की सबसे दुर्गम यात्राओं में गिनी जाती है…

लेकिन हमारे बिहार-झारखंड के श्रद्धालु… इसे भी सुगम बना देते हैं।
कोई 5 बार जा चुका है…
कोई 10 बार…
और हर बार एक ही बात कहता है—
“बुलावा आता है… तभी जाना होता है।”
एक श्रद्धालु कहते हैं—
“जो कुछ मांगो… बाबा बर्फानी सब पूरा करते हैं।”
अब ज़रा आज का नज़ारा देखिए…
आज “जय भोले भंडारी” ऑफिस में पूजा हुई…
और यहां भक्ति का माहौल ऐसा… कि हर कोई बस एक ही इंतज़ार में है—
👉 रजिस्ट्रेशन कब शुरू होगा?
👉 मेडिकल कब होगा?
👉 और हम बाबा के दरबार कब पहुंचेंगे?
लोग लाइन में खड़े हैं…
चेहरे पर उम्मीद है…
और दिल में सिर्फ एक ही आवाज़—
“हर हर महादेव!”
अब आपको बताते हैं… इस पूरी यात्रा के पीछे की असली ताकत—
जय भोले भंडारी सेवा दल (Registered)
बिहार और झारखंड का इकलौता रजिस्टर्ड भंडारा…
जो सिर्फ यात्रा नहीं कराता…
बल्कि पूरी जिम्मेदारी उठाता है।
रजिस्ट्रेशन से लेकर…
मेडिकल चेकअप तक…
और सुबह 7:30 बजे से भंडारा—
यानि खाने-पीने की पूरी व्यवस्था…
सब कुछ यही सेवा दल संभालता है।
सीवान… पटना… बलिया… बेतिया… मोतिहारी… मुजफ्फरपुर…
दूर-दराज़ से लोग इस जत्था के साथ जुड़ते हैं।
क्योंकि यहां सिर्फ सुविधा नहीं…
भरोसा मिलता है…
और सबसे बड़ी बात—
बाबा तक पहुंचने का एक मजबूत सहारा मिलता है।
अमरनाथ की ये यात्रा…
सिर्फ पहाड़ों की चढ़ाई नहीं है…
ये विश्वास की कहानी है…
भक्ति की कहानी है…
और उस बुलावे की कहानी है…
जो हर किसी को नहीं मिलता…
और जब वो बुलावा आता है…
तो बस एक ही आवाज़ गूंजती है—
“चलो बुलावा आया है… बाबा ने बुलाया है…”

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