पटना के बिहार म्यूजियम ने रचा इतिहास, एशिया में नंबर-1 और दुनिया में 9वां स्थान
पटना। बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। राजधानी पटना स्थित बिहार म्यूजियम को दुनिया के 100 सर्वश्रेष्ठ संग्रहालयों की सूची में नौवां स्थान मिला है। खास बात यह है कि एशिया के संग्रहालयों में इसे पहला स्थान हासिल हुआ है।
जर्मनी के म्यूनिख से प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल गाइड Worth a Journey की वर्ष 2026 की रैंकिंग में बिहार म्यूजियम ने यह उपलब्धि हासिल की है। इस सूची में बिहार म्यूजियम ने दुनिया के कई प्रतिष्ठित संग्रहालयों को पीछे छोड़ दिया है।
लूव्र म्यूजियम को भी छोड़ा पीछे
इस अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में फ्रांस के प्रसिद्ध लूव्र म्यूजियम को 31वां स्थान मिला है, जबकि अमेरिका के मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट को 10वां स्थान प्राप्त हुआ है। वहीं पटना का बिहार म्यूजियम नौवें स्थान पर रहा।
यह उपलब्धि बिहार के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि इससे राज्य की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिली है।

क्या है बिहार म्यूजियम की खासियत?
पटना का बिहार म्यूजियम प्राचीन भारतीय इतिहास, कला और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां प्राचीन मूर्तियां, दुर्लभ कलाकृतियां, पुरातात्विक अवशेष और ऐतिहासिक धरोहरों का संग्रह मौजूद है।
दीदारगंज की प्रसिद्ध यक्षी प्रतिमा यहां के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। आधुनिक वास्तुकला और ऐतिहासिक धरोहरों का अनूठा संगम इस संग्रहालय को विशिष्ट बनाता है।
नीतीश कुमार की परिकल्पना का मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान
बिहार म्यूजियम की स्थापना पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की परिकल्पना के तहत की गई थी। वर्ष 2015 में इसका उद्घाटन हुआ था। आज यह संग्रहालय बिहार की पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने भी इस उपलब्धि का जिक्र करते हुए बिहार के लिए इसे गौरवपूर्ण बताया है।
बिहार के पर्यटन को मिल सकती है नई पहचान
बिहार म्यूजियम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली यह रैंकिंग राज्य के पर्यटन क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे देश-विदेश के पर्यटकों का ध्यान पटना की ओर आकर्षित हो सकता है।
बिहार की पहचान नालंदा, विक्रमशिला, बोधगया और प्राचीन सभ्यता से जुड़ी रही है। अब पटना का बिहार म्यूजियम भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पहचान को और मजबूत कर रहा है।
बिहार की विरासत अब सिर्फ इतिहास के पन्नों में नहीं, बल्कि दुनिया के शीर्ष संग्रहालयों की सूची में भी अपनी जगह बना रही है।

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