दे मातरम् के नारों से गूंज उठा बचपन
“वंदे मातरम्… वंदे मातरम्…”
इन नारों की गूंज सुनकर अगर आपको अपने बचपन का स्कूल याद आ जाए, तो हैरान मत होइए। क्योंकि यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि उस पीढ़ी की आवाज है जो आने वाले भारत की तस्वीर बनने वाली है।
यह दृश्य है छपरा के बिरला ओपन माइंड्स इंटरनेशनल स्कूल का। मौका था देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस का। तिरंगा आसमान में लहरा रहा था और नीचे खड़े नन्हे बच्चे पूरे जोश के साथ वंदे मातरम् के नारे लगा रहे थे।
आज के दौर में अक्सर कहा जाता है कि बच्चों का बचपन मोबाइल की स्क्रीन में कैद हो गया है। लेकिन इस तस्वीर में बचपन किताबों, संस्कारों और देशभक्ति के साथ दिखाई देता है। यहां बच्चों को सिर्फ गणित, विज्ञान और अंग्रेजी नहीं पढ़ाई जाती, बल्कि उन्हें यह भी सिखाया जाता है कि तिरंगे की कीमत क्या है, आजादी का मतलब क्या है और देश से प्रेम क्यों जरूरी है।

15 अगस्त के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। किसी के हाथ में तिरंगा था, कोई देशभक्ति गीत गा रहा था, तो कोई मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहा था। यह सिर्फ सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि नई पीढ़ी को देश के इतिहास और मूल्यों से जोड़ने की एक कोशिश थी।
बिरला ओपन माइंड्स इंटरनेशनल स्कूल का दावा है कि वह बच्चों को केवल शिक्षा नहीं, बल्कि संस्कार, आत्मविश्वास और समग्र विकास का वातावरण भी देता है। शायद यही वजह है कि यहां का माहौल पढ़ाई के साथ-साथ व्यक्तित्व निर्माण पर भी बराबर जोर देता है।
और अब सबसे महत्वपूर्ण बात। जब पूरे कार्यक्रम के बाद स्कूल की प्रिंसिपल से बात हुई, तो उन्होंने बच्चों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के महत्व पर अपनी बात रखी।
आइए, अब सुनते हैं कि इस अवसर पर स्कूल की प्रिंसिपल ने क्या कहा.

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