सारण की धरती पर एक ऐसी जगह है, जहां पत्थर भी कहानी सुनाते हैं।
कहते हैं, यहीं महर्षि गौतम का आश्रम था। यहीं माता अहिल्या वर्षों तक श्रापवश पत्थर बनी रहीं। और यहीं भगवान श्रीराम के चरण पड़ते ही वह पत्थर फिर से जीवन में बदल गया। रामायण का यह प्रसंग करोड़ों लोगों की आस्था का हिस्सा है।
लेकिन सवाल यह है कि जिस स्थल की पहचान भगवान श्रीराम, माता अहिल्या और महर्षि गौतम से जुड़ती हो, वह आज तक देश के बड़े धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर अपनी जगह क्यों नहीं बना सका?
शायद इसी सवाल का जवाब खोजने की कोशिश अब शुरू हुई है।
रिविलगंज स्थित गौतम ऋषि आश्रम-अहिल्या उद्धार स्थल को धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने और रामायण सर्किट से जोड़ने की पहल जिला प्रशासन ने शुरू की है। उप विकास आयुक्त लक्ष्मण तिवारी ने स्थल का निरीक्षण किया और यहां मिलने वाली सुविधाओं का खाका तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

योजना है कि यहां भव्य प्रवेश द्वार बने, श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था हो, आधुनिक शौचालय बनें, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था हो, पार्किंग स्थल विकसित किए जाएं और विश्राम स्थल तैयार किए जाएं। आने वाले पर्यटकों को जानकारी देने के लिए दिशा-सूचक बोर्ड और पर्यटन सूचना-पट्ट भी लगाए जाएंगे।
अगर यह सब होता है, तो यह सिर्फ एक स्थल का विकास नहीं होगा। यह उस कहानी को सम्मान देने जैसा होगा, जो सदियों से लोगों की आस्था में जीवित है। इससे धार्मिक पर्यटन बढ़ेगा, स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और सारण की पहचान देश-दुनिया तक पहुंचेगी।
अब उम्मीद यही है कि यह पहल सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे। क्योंकि जिस भूमि को रामायण की कथा से जोड़ा जाता है, वह केवल इतिहास नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं का भी केंद्र बन सकती है।
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