तमिलनाडु…
दक्षिण का वो सूबा, जहां राजनीति सिर्फ सरकार नहीं बनाती—
बल्कि एक सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाती है।
यहां सत्ता की कहानी सिर्फ विधानसभा में नहीं लिखी जाती…
बल्कि सिनेमा के पर्दे से शुरू होती है।
सालों तक इस राज्य की राजनीति दो ध्रुवों के बीच घूमती रही—
DMK… और AIADMK…
लेकिन इन दोनों की जड़ें भी कहीं न कहीं फिल्मी दुनिया से ही जुड़ी रहीं।

DMK के दिग्गज नेता करुणानिधि…
सिर्फ राजनेता नहीं थे—
वो तमिल सिनेमा के स्क्रिप्ट राइटर थे, संवाद लिखते थे, विचार गढ़ते थे।
वहीं AIADMK की पहचान बनी—
एम.जी. रामचंद्रन… और बाद में जयललिता।
दोनों बड़े फिल्मी चेहरे…
जिन्होंने पर्दे की लोकप्रियता को
सीधे जनता के भरोसे में बदल दिया।


यानी तमिलनाडु में राजनीति और सिनेमा का रिश्ता नया नहीं है…
बल्कि दशकों पुराना है।
और अब…
2026 के चुनाव में उसी परंपरा का नया अध्याय जुड़ा है।
थलपति विजय…
साउथ सिनेमा के सुपरस्टार…
और अब TVK के चेहरा।
234 सीटों वाली विधानसभा…
बहुमत का आंकड़ा 118…
और नतीजा—
TVK 108 सीट।
मतलब…
सत्ता से बस 10 कदम दूर।
सिर्फ 2 साल पुरानी पार्टी…
लेकिन प्रदर्शन ऐसा—
जैसे वर्षों से राजनीति में जमी हो।
विजय ने चुनाव को सिर्फ प्रचार नहीं बनाया…
बल्कि एक नैरेटिव बनाया।
महिलाओं को आर्थिक मदद…
छात्रों को सहायता…
युवाओं को भत्ता…
किसानों को राहत…
हर वर्ग को टारगेट…
हर वर्ग तक मैसेज।
लेकिन कहानी में एक और मोड़ भी था—
बिहार के मजदूरों को लेकर उठा विवाद।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुए…
आरोप लगे कि प्रवासी मजदूर सुरक्षित नहीं…
हालांकि मुख्यमंत्री M.K. Stalin ने कहा—
“हर मजदूर हमारा अपना है…”
लेकिन चुनावी माहौल में यह मुद्दा गर्म रहा।
राजनीतिक बयान चले…
रणनीतिकारों ने इसे उठाया…
और जनता के बीच चर्चा बनी रही।
और फिर…
जनता ने अपना फैसला सुना दिया।
एक बार फिर यह साबित हुआ—
कि तमिलनाडु में
सिनेमा और राजनीति का मेल सिर्फ इत्तेफाक नहीं… एक सिस्टम है।
पहले करुणानिधि…
फिर एमजीआर और जयललिता…
और अब विजय…
पर्दे से निकलकर
सीधे सत्ता के दरवाजे तक।
अब सवाल ये नहीं कि
विजय सफल हुए या नहीं…
सवाल ये है—
क्या वो 108 से 118 का सफर तय कर पाएंगे?
क्योंकि राजनीति का क्लाइमेक्स…
हमेशा आखिरी सीन में ही आता है।
और अभी…
तमिलनाडु की इस कहानी में—
इंटरवल चल रहा है।
![]()









Leave a Reply