शादी का माहौल है… रोशनी है… गाना-बजाना है… और ऊपर उड़ रहा है एक ड्रोन—खुशियों को कैद करने के लिए।
लेकिन अचानक… उस ड्रोन की नज़र में जो कैद होता है, वो किसी फिल्म का सीन नहीं—हकीकत का डरावना चेहरा है।
एक ही बाइक पर तीन युवक…
बीच में बैठा एक लड़का…
हाथ में खुला लहराता कट्टा…
और फिर—धांय…!
गोली चलती है…
और वो गोली किसी दुश्मन को नहीं,
बल्कि कैमरा चला रहे एक इंसान को लगती है…

जो सिर्फ अपना काम कर रहा था… शादी की खुशियां रिकॉर्ड कर रहा था।
घटना Siwan के जीबी नगर थाना क्षेत्र के डीके सारण पूर की है।
कैमरामैन—नीतीश कुमार—अब अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
पहले Siwan Sadar Hospital…
फिर हालत बिगड़ी तो PMCH Patna रेफर।
अब सवाल ये नहीं है कि गोली किसने चलाई…
सवाल ये है कि इतनी हिम्मत आई कहां से?
ड्रोन कैमरा ऊपर उड़ रहा था…
नीचे कानून उड़ गया था क्या?
ये कोई गैंगवार नहीं…
कोई दुश्मनी का खुला ऐलान भी नहीं…
ये एक सार्वजनिक समारोह में, खुलेआम, कैमरे के सामने फायरिंग है।
तो क्या अब बिहार में शादी में DJ के साथ “गन कल्चर” भी पैकेज में आएगा?
क्या अब कैमरामैन को कैमरे के साथ बुलेटप्रूफ जैकेट भी पहननी होगी?
पुलिस कह रही है—जांच चल रही है…
अपराधियों की तलाश जारी है…
लेकिन सिवान पूछ रहा है—

“जब गोली चल रही थी… तब कानून कहाँ था?”
ये सिर्फ एक घटना नहीं है…
ये उस सिस्टम का आईना है
जहाँ अपराधी कैमरे से नहीं डरते…
बल्कि कैमरे पर ही गोली चला देते हैं।**

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