जो खबर है… ये सिर्फ एक हादसा नहीं है, ये हमारे गांवों की सच्चाई है…”
छपरा के गौरा थाना क्षेत्र के सिसवा गांव में एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई… लेकिन सवाल है—क्या ये सिर्फ एक तूफान था, या हमारी लापरवाही भी इसमें शामिल है?
65 साल की सुथरी देवी…
शाम का वक्त… खाना बनाने की तैयारी…
सब कुछ सामान्य था…
तभी अचानक तेज आंधी आई… तूफान आया… और उस तूफान ने सिर्फ छत नहीं उड़ाई… एक ज़िंदगी उड़ा दी।
पास के एक घर की छत पर लगा करकट… पूरा का पूरा उड़कर आया…
और सीधे सुथरी देवी के ऊपर गिरा।

सोचिए…
एक महिला अपने घर के पास खड़ी है…
उसे क्या पता कि आसमान से मौत उड़कर आने वाली है?
गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया…
लेकिन रास्ते में ही… उनकी सांसें थम गईं।
उनके बेटे मिंटू शर्मा बताते हैं—
“सब कुछ अचानक हुआ… समझ ही नहीं पाए…”
लेकिन सवाल ये है—
क्या ये सिर्फ “अचानक” था?
गांवों में आज भी कच्चे और असुरक्षित छत…
ढीले करकट…
बिना किसी सुरक्षा के लगाए गए ढांचे…
क्या ये हादसे को न्योता नहीं देते?
जब भी तूफान आता है…
हम कहते हैं—प्रकृति का कहर।
लेकिन क्या हमने कभी सोचा…
हमारी तैयारी कितनी है?
ये मौत सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है…
ये एक सवाल है—प्रशासन से…
और हम सब से भी।
क्यों हर साल आंधी आती है…
और हर साल कोई ना कोई यूं ही मर जाता है?

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