सारण के मांझी से एक ऐसी खबर आई है, जो सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि हमारे समाज के बिगड़ते हालात की पूरी तस्वीर है।
27 साल का एक युवक…
नाम – राजा ठाकुर…
पहचान – वार्ड पार्षद…
और आज… उसका तिलक चढ़ने वाला था।
घर में शादी की तैयारियाँ चल रही थीं।
टेंट लग रहा था, मेहमानों के आने की तैयारी थी, और परिवार एक नई शुरुआत के सपने बुन रहा था।
लेकिन…
बीती रात सब कुछ बदल गया।
बताया जा रहा है कि टेंट लगाने के दौरान पड़ोसियों से किसी बात को लेकर विवाद हुआ।
विवाद… जो आमतौर पर कुछ देर में खत्म हो जाता है…
लेकिन इस बार बात बढ़ी… और इतनी बढ़ी कि जान ले ली गई।
आरोप है कि पड़ोसियों ने पहले झगड़ा किया, फिर बाहर से लोगों को बुलाया… और देखते ही देखते एक दर्जन से ज्यादा लोग जुट गए।
इसके बाद जो हुआ… वो खौफनाक था।
राजा ठाकुर पर ताबड़तोड़ चाकू से हमला किया गया।
वो वहीं लहूलुहान होकर गिर पड़े।
जब उसके भाई बचाने आए…
तो उन्हें भी नहीं बख्शा गया।
तीनों को चाकू मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया।
सदर अस्पताल ले जाया गया…
जहाँ डॉक्टरों ने राजा ठाकुर को मृत घोषित कर दिया।
सोचिए…
जिस घर में आज तिलक की रस्म होनी थी,
वहीं अब मातम पसरा है।
माँ-बाप… जिनके बेटे की बारात निकलनी थी,
अब उसी बेटे की अर्थी उठेगी।
गांव में सन्नाटा है…
और सवाल भी—
क्या अब छोटी-छोटी बातों पर जान लेना इतना आसान हो गया है?
क्या कानून का डर खत्म हो चुका है?
और क्या शादी के घर भी अब सुरक्षित नहीं रहे?
फिलहाल पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच में जुटी है, शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।
लेकिन असली सवाल वही है—
“कब तक?”
कब तक इस तरह सपनों को चाकू से काटा जाता रहेगा…
और कब तक शहनाई की जगह चीखें सुनाई देती रहेंगी…?
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