“ये सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं है…
ये छपरा के डोरीगंज का वो चक्रव्यूह है, जिसमें बंगाल से निकला एक परिवार फँसा… और सब कुछ खो दिया।
पश्चिम बंगाल के बिन्नागुड़ी से एक परिवार निकला था…
मंज़िल थी मध्य प्रदेश का रीवा।
सफर लंबा था… लेकिन साथ था अपना परिवार, अपनी कार… और घर पहुँचने की जल्दी।
लेकिन छपरा का डोरीगंज…
जहां सड़कें कम और बालू के ट्रक ज़्यादा दिखते हैं…
जहां नियम नहीं, रफ्तार चलती है।
उसी रफ्तार ने इस परिवार को अपने चक्रव्यूह में फँसा लिया।
एक तेज़ रफ्तार अज्ञात वाहन…
एक ज़ोरदार टक्कर…
और एक पल में सब कुछ बदल गया।
निर्मला सिंह… उम्र 44 साल…
मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
उनके पति—आर्मी के जेसीओ गजेंद्र सिंह चौहान…
और उनके दो बच्चे…
आज पटना एम्स में जिंदगी और मौत के बीच लड़ाई लड़ रहे हैं।
सोचिए…
जो व्यक्ति देश की रक्षा करता है…
वो अपनी ही सड़क पर सुरक्षित क्यों नहीं है?
मध्य प्रदेश से भागते हुए परिजन छपरा पहुंचे…
पोस्टमार्टम हाउस के बाहर इंतज़ार…
और अंदर एक अधूरी कहानी।
निर्मला सिंह के भाई कहते हैं—
“घर आ रहे थे… लेकिन घर तक नहीं पहुँच पाए।”
ये सिर्फ एक हादसा नहीं है…
ये सिस्टम की खामोशी है।
सवाल अब भी वही है—
क्या अगली खबर आने तक… सब कुछ ऐसे ही चलता रहेगा?”
![]()







Leave a Reply