छपरा ग्रामीण रेलवे स्टेशन के पास स्थित रैक पॉइंट पर आज ट्रैक्टर और ट्रक मालिकों तथा चालकों ने कामकाज ठप कर दिया। मालगाड़ियों से आने वाले सामान की ढुलाई प्रभावित रही और हड़ताली वाहन मालिकों ने परिवहन विभाग एवं प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
प्रदर्शन कर रहे चालकों और मालिकों का कहना है कि रैक पॉइंट पर क्षमता से अधिक माल लादने का दबाव बनाया जाता है। उनका आरोप है कि बाद में सड़क पर जांच के दौरान चुनिंदा वाहनों पर कार्रवाई कर भारी जुर्माना लगाया जाता है, जबकि कुछ वाहन बिना किसी परेशानी के निकल जाते हैं।

हड़तालियों का कहना है कि यदि ओवरलोडिंग कानून के खिलाफ है तो इसकी शुरुआत वहीं रोकी जानी चाहिए जहां माल लादा जाता है। उनका सवाल है कि जब रैक पॉइंट से वाहन निकलते समय वजन की जानकारी होती है, तो फिर सड़क पर केवल कुछ वाहनों पर ही कार्रवाई क्यों होती है?
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) से मुलाकात करेंगे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे। उनका कहना है कि यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा तथा जरूरत पड़ने पर पटना तक भी जाएंगे।

रैक पॉइंट पर जारी इस हड़ताल ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि ओवरलोडिंग की जिम्मेदारी आखिर किसकी है और कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से हो रहा है या नहीं?
(यह खबर हड़ताल कर रहे ट्रैक्टर-ट्रक मालिकों और चालकों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। प्रशासन और परिवहन विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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