मुजफ्फरपुर का अस्पताल, ICU में आग और जिंदगी की लड़ाई..
बिहार के मुजफ्फरपुर से एक ऐसी खबर आई है, जिसे सुनकर दिल बैठ जाता है।
एक अस्पताल… जहां लोग जिंदगी बचाने आते हैं। जहां परिवार उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। जहां डॉक्टर और नर्सें मौत से लड़ने की कोशिश करती हैं। उसी अस्पताल के आईसीयू में आग लग जाती है।
मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा इलाके में स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में देर रात करीब तीन बजे आग लगने की खबर आती है। बताया जा रहा है कि आग इतनी तेजी से फैली कि आईसीयू धुएं और लपटों से भर गया। वहां भर्ती मरीजों के पास भागने की भी कोई जगह नहीं थी।

सोचिए, जो मरीज खुद चलने-फिरने की स्थिति में नहीं हैं, जो ऑक्सीजन और मशीनों के सहारे जिंदगी की डोर पकड़े हुए हैं, उनके लिए आग और धुआं कितना बड़ा खतरा बन जाता है।
दमकल की गाड़ियां पहुंचती हैं। खिड़कियां तोड़ी जाती हैं। दरवाजे तोड़े जाते हैं। मरीजों को बाहर निकाला जाता है। कई लोगों की जान बचा ली जाती है, लेकिन कुछ जिंदगियां ऐसी भी रहीं जिन्हें बचाया नहीं जा सका।
प्रारंभिक जानकारी में कई मरीजों की मौत की बात सामने आ रही है। हालांकि प्रशासन की ओर से अंतिम और आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार है।
अब सवाल वही है जो हर बड़े हादसे के बाद पूछा जाता है। क्या अस्पताल में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे? क्या फायर ऑडिट हुआ था? क्या आपातकालीन निकास रास्ते पूरी तरह कार्यरत थे? अगर शॉर्ट सर्किट की आशंका है, तो बिजली व्यवस्था की नियमित जांच क्यों नहीं हुई?

अस्पताल केवल इमारत नहीं होते। वहां मरीज होते हैं, उनके सपने होते हैं, उनके परिवार की उम्मीदें होती हैं। जब अस्पताल ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो लोग अपनी जिंदगी किसके भरोसे छोड़ेंगे?
मुजफ्फरपुर की यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं है। यह हमारे स्वास्थ्य ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
फिलहाल घायलों का इलाज चल रहा है, जांच के आदेश दे दिए गए हैं और मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। लेकिन उन परिवारों के लिए यह रात शायद कभी खत्म नहीं होगी, जिन्होंने अपने किसी अपने को अस्पताल में भर्ती कराया था और सुबह एक दुखद खबर मिली।
“अस्पताल में लगी आग सिर्फ दीवारों को नहीं जलाती, कई परिवारों की उम्मीदें भी राख कर जाती है।”

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