“शहर जब करवट लेता है,
तो सिर्फ इमारतें नहीं बदलतीं…
रास्ते बदलते हैं, रफ्तार बदलती है,
और बदल जाती है लोगों की जिंदगी।”

नमस्कार,
आज बात छपरा की… उस छपरा की जो अब सिर्फ भीड़, जाम और तंग गलियों की पहचान नहीं रहेगा, बल्कि विकास की नई रेखा खींचने जा रहा है।
बात हो रही है मरीन ड्राइव की — एक ऐसी परिकल्पना, जो छपरा को नए नक्शे पर स्थापित करने वाली है।

जिस तरह Patna में Gandhi Maidan तक पहुँचने के लिए पहले पूरे शहर का चक्कर लगाना पड़ता था, लेकिन मरीन ड्राइव ने दूरी और समय दोनों को कम कर दिया… ठीक उसी तर्ज पर अब छपरा में भी बदलाव की बयार है।
यह प्रस्तावित मरीन ड्राइव सरयू और गंगा के किनारे-किनारे विकसित की जा रही है —

एक तरफ शांत बहती हुई Saryu River,
दूसरी ओर विराट स्वरूप में बहती Ganga River।
योजना के अनुसार, यह सड़क माझी की ओर से छपरा में प्रवेश से पहले शुरू होगी और पूरे शहर को बाईपास करते हुए डोरीगंज में जाकर जुड़ेगी, जहाँ से सीधा संपर्क होगा Veer Kunwar Singh Setu यानी आरा-छपरा पुल से।
मतलब साफ है —

अब लंबी दूरी की गाड़ियाँ शहर के जाम में फँसे बिना पटना, आरा या बनारस की दिशा में आसानी से निकल सकेंगी।
🚗 एक तरफ डबल डेकर सड़क का सपना,
🌊 दूसरी तरफ नदी किनारे मरीन ड्राइव का खूबसूरत दृश्य।
छपरा के लिए यह सिर्फ सड़क नहीं —
यह भीड़ से मुक्ति है,
यह जाम से राहत है,
यह समय की बचत है।
हाँ, विकास के इस रास्ते में जमीन अधिग्रहण भी है।
नदी किनारे बसे कुछ परिवारों को विस्थापन की चिंता है।
सरकार मुआवजे का दावा कर रही है।

लेकिन सवाल यही है —
क्या विकास और मानवीय संवेदना साथ-साथ चल पाएँगे?
काम की शुरुआती झलक दिखने लगी है।
जमीन चिन्हित हो रही है।
तकनीकी प्रक्रियाएँ जारी हैं।
और अगर सब कुछ योजना के अनुसार चला —
तो उम्मीद है 2028 से पहले छपरा के लोग इस मरीन ड्राइव पर सफर करते नजर आएँगे।
सुखद यात्रा…
खूबसूरत दृश्य…
और एक नया छपरा।

