छपरा के बस स्टैंड के पास इन दिनों कुछ अलग ही नजारा है…
नाम है—डिज्नीलैंड मेला!
अब नाम सुनकर अगर आप अमेरिका वाला डिज्नीलैंड सोच रहे हैं…
तो ज़रा रुकिए…
ये है हमारा देसी डिज्नीलैंड… जहां गांव की खुशबू और शहर का मज़ा—दोनों एक साथ मिलता है।

करीब 50 साल पुरानी इस परंपरा को आज भी जिंदा रखा गया है…
जहां वो पुराने झूले… वही मेला… वही हंसी…
जो कभी गांवों में हुआ करती थी…
अब शहर के बीचों-बीच सज गई है।
और इस बार मेला थोड़ा खास है…
क्योंकि आयोजक लेकर आए हैं—भूलभुलैया…
जहां अंदर गए तो बाहर निकलना खुद की जिम्मेदारी!
साथ ही 3D शो… और कई नए प्रयोग…
मतलब… एंटरटेनमेंट फुल ऑन!
शाम के 4 बजे से लेकर रात के 10 बजे तक…
आप यहां आ सकते हैं…
झूला झूल सकते हैं…
शो देख सकते हैं…

कुछ खा-पी सकते हैं…
और थोड़ा बहुत खरीदारी भी कर सकते हैं।
मेला का उद्घाटन किया गया
कला संस्कृति पदाधिकारी डॉ. विभा भारती,
पूर्व मेयर राखी गुप्ता,
रागिनी कुमारी,
धर्मेंद्र चौहान और रमाकांत सिंह उर्फ डब्लू जी ने…
फीता काटकर और दीप जलाकर इस मेले की शुरुआत की गई।
आयोजकों का कहना है—
पिछले 2 साल से छपरा में मेला लगा रहे हैं…
लेकिन इस बार कुछ यूनिक करने की कोशिश की गई है।
तो अगर आप भी चाहते हैं…
थोड़ा बचपन फिर से जीना…

या अपने बच्चों को असली मेला दिखाना…
तो एक बार जरूर जाइए…
छपरा का ये डिज्नीलैंड मेला आपका इंतजार कर रहा है।
🎯 जाइए… देखिए… और मजा लीजिए!







