
छपरा के प्रेक्षागृह में आज माहौल सिर्फ एक जयंती का नहीं था, बल्कि विचारों के पुनर्जागरण का था। मौका था महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती सह उत्सव समारोह का — और भीड़ बता रही थी कि फुले आज भी ज़िंदा हैं, अपने विचारों में।
जिन्होंने समाज को सिर्फ देखा नहीं, बल्कि उसे बदलने की ठानी। महात्मा ज्योतिबा फुले वो नाम है जिसने जाति, भेदभाव और कुरीतियों के खिलाफ खुलकर आवाज़ उठाई। विधवा विवाह, महिला शिक्षा और सामाजिक समानता — ये उनके एजेंडे नहीं, बल्कि उनका मिशन था।
छपरा में आयोजित इस कार्यक्रम में मालाकार समाज के लोगों की बड़ी भागीदारी दिखी। उनके लिए फुले सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि प्रेरणा हैं। मंच पर कई गणमान्य लोग मौजूद रहे, जिनमें भाजपा जिला अध्यक्ष रणजीत सिंह समेत कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि फुले ने जो लड़ाई शुरू की थी, वो आज भी जारी है। समाज में बराबरी और सम्मान की जो बात उन्होंने उठाई, वही आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
यह आयोजन सिर्फ फूल चढ़ाने तक सीमित नहीं रहा। यहां फुले के विचारों को समझने, अपनाने और आगे बढ़ाने की बात हुई। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि अगर समाज को सच में बदलना है, तो फुले के रास्ते पर चलना ही होगा।
आज का यह आयोजन छपरा में एक संदेश छोड़ गया —
महापुरुषों को याद मत करो, उनके विचारों को जियो।
Sanjeev Mishra desk

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