
बिहार के सारण जिला के छपरा शहर से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां एक प्राइवेट स्कूल के बाहर सैकड़ों की संख्या में पेरेंट्स और गार्जियन विरोध प्रदर्शन करते नजर आए।
मामला शहर के HR इंपीरियल स्कूल का है, जो एसपी और डीएम आवास के ठीक सामने स्थित है।
बताया जा रहा है कि 4 अप्रैल को जिला प्रशासन की तरफ से एक आदेश जारी किया गया था— जिसमें साफ कहा गया था कि प्राइवेट स्कूल री-एडमिशन, यूनिफॉर्म और किताबों के नाम पर मनमानी फीस नहीं वसूलेंगे।
लेकिन आरोप है कि ये आदेश फाइलों तक ही सीमित रह गया।
आज जब नया सत्र शुरू हुआ, तो पेरेंट्स का गुस्सा फूट पड़ा। उनका कहना है कि स्कूल ने “एडमिशन फीस” का नाम बदलकर “एनुअल फीस” कर दिया, लेकिन वसूली पहले जैसी ही जारी है।
पेरेंट्स के आरोप:
एनुअल फीस के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है
किताबें सिर्फ प्राइवेट पब्लिशर्स की, और बेहद महंगी
यूनिफॉर्म और अन्य चार्ज भी बढ़ा दिए गए हैं
गार्जियन का साफ कहना है—
“अगर सरकार सिर्फ आदेश ही देगी और उसे लागू नहीं कराएगी, तो ऐसे आदेश का क्या मतलब?”
हालांकि, स्कूल प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है।
स्कूल के प्रिंसिपल अरविंद कुमार का कहना है—
“हम पूरी तरह एजुकेशन गाइडलाइन फॉलो कर रहे हैं। एडमिशन फीस नहीं ली जाती, लेकिन एनुअल फीस में हर साल की तरह बढ़ोतरी की जाती है। किताबें कहीं से भी खरीदी जा सकती हैं, लेकिन प्राइवेट और कलरफुल होने की वजह से उनका दाम ज्यादा होता है।”
अब सवाल यही है—
जब आदेश जारी हो चुका है, तो उसका पालन क्यों नहीं हो रहा?
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो अगला कदम और बड़ा होगा—
रोड जाम और स्कूल में तालाबंदी तक की बात कही गई है।
वहीं मौके पर पहुंचे टाउन थाना प्रभारी संजीव कुमार ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया और कहा कि वे अपनी शिकायत जिलाधिकारी के सामने रखें, नियम के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब देखने वाली बात ये होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है—
और सबसे बड़ा सवाल, क्या आम आदमी की जेब पर ये बोझ कम होगा?

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