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छपरा में SBI पेंशनर्स की बड़ी बैठक: नई कमेटी का चुनाव, एकजुटता का संदेश

“रिटायरमेंट के बाद भी साथ—सारण में पेंशनर्स की एकजुटता की कहानी”
छपरा के ब्रजकिशोर गार्डेन स्कूल का वह हॉल…
जहां उम्र भले 60, 70 या 80 के पार हो चुकी थी, लेकिन आवाज़ों में अब भी वही जोश था—अपने हक की लड़ाई का, अपने साथियों के साथ खड़े रहने का।
दिनांक 3 मई 2026
स्टेट बैंक पेंशनर्स एसोसिएशन, जिला सारण (छपरा यूनिट) की आमसभा शुरू होती है… और यह सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि अनुभव, संघर्ष और साथ निभाने की एक जीवंत मिसाल बन जाती है।
मंच पर एक-एक कर चेहरे आते हैं—
मुजफ्फरपुर के अंचल अध्यक्ष अजय कुमार,
उप महासचिव नीलमणि सिन्हा,
पटना प्रमंडल के अध्यक्ष चंदेश्वर प्रसाद सिंह,
महासचिव हरेंद्र प्रसाद…
ये सिर्फ नाम नहीं, बल्कि उन हजारों पेंशनर्स की आवाज़ हैं, जो आज भी अपने अधिकारों के लिए सजग हैं।

जब बात शुरू होती है—तो मुद्दे सीधे दिल से निकलते हैं:
पेंशन, सुरक्षा, सम्मान… और सबसे बढ़कर—साथ।
सभा की अध्यक्षता करते हैं जिला अध्यक्ष वीरेंद्र प्रसाद सिंह।
जिला सचिव रामेश्वर प्रसाद जब बोलते हैं, तो उनके शब्दों में सिर्फ समस्याएं नहीं, बल्कि समाधान की जिद भी दिखती है।
फिर आता है चुनाव का क्षण…
जहां लोकतंत्र की सबसे सादगी भरी तस्वीर दिखती है—सर्वसम्मति।
# 2025–2028 के लिए नई जिला कमेटी:
जिला अध्यक्ष – रामेश्वर प्रसाद
जिला उपाध्यक्ष – विभूति नारायण शर्मा
जिला सचिव – राजकुमार मिश्रा
उप सचिव – विश्व मोहन सिंह
कोषाध्यक्ष – करण सिंह
और साथ में कार्यकारी सदस्य—एक पूरी टीम, जो आने वाले वर्षों में इस कारवां को आगे बढ़ाएगी।
लेकिन इस पूरी कहानी की सबसे बड़ी बात क्या है?

* यह कोई आम संगठन नहीं…
*यह “पेंशनर्स का परिवार” है।
जहां रिटायरमेंट के बाद जब ज़िंदगी थोड़ी धीमी हो जाती है…
जहां दोस्त कम होने लगते हैं…
वहीं यह एसोसिएशन फिर से जुड़ने का मौका देती है।
यहां लोग सिर्फ मीटिंग नहीं करते—
साथ बैठते हैं, चाय पीते हैं, हंसते हैं…
और जब जरूरत पड़ती है—तो एक-दूसरे के लिए लड़ते भी हैं।
चाहे पेंशन की समस्या हो,
इंश्योरेंस का मामला हो,
या किसी साथी के निधन पर संवेदना राशि—
यह संगठन हर मोर्चे पर खड़ा मिलता है।
और शायद यही वजह है कि…
जब एक पेंशनर इस ग्रुप से जुड़ता है,
तो उसे सिर्फ एक संगठन नहीं मिलता—
बल्कि एक एहसास मिलता है…
“हम अकेले नहीं हैं।”
अंत में मंच से धन्यवाद ज्ञापन होता है…
लेकिन असल में धन्यवाद उन रिश्तों को जाता है,
जो नौकरी खत्म होने के बाद भी खत्म नहीं होते।
कहानी अभी खत्म नहीं हुई…
आगे आप सुनेंगे—पटना प्रमंडल के अध्यक्ष और साथियों के अनुभव,
जो बताएंगे कि यह सफर कितना “खट्टा-मीठा” रहा है… और कितना ज़रूरी भी।

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