“आम आदमी की ज़िंदगी भी अक्सर गुमनाम होती है… और मौत भी गुमनामी में खो जाती है…”
एक आदमी… जो अपने टोटो (ई-रिक्शा) पर खुद सब्ज़ी बेचकर पूरे परिवार का भरण-पोषण करता था।
दिनभर मेहनत… ताकि घर का चूल्हा जल सके।

तीन छोटे-छोटे मासूम बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी जुटा सके…
लेकिन किसे पता था कि रोज़ी-रोटी का वही टोटो, एक दिन उसकी जिंदगी छीन लेगा।
सारण के खैरा थाना क्षेत्र के कोरेया गांव निवासी उदय प्रकाश साह, पिता पंचम साह, रात में ससुराल से अपने टोटो पर घर लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि रास्ते में ई-रिक्शा अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसा इतना दर्दनाक था कि टोटो उनकी गर्दन पर ही पलट गई और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
घर पर शायद तीन मासूम बच्चे इंतज़ार कर रहे होंगे…
“पापा आएंगे…”

लेकिन इस बार पिता घर नहीं लौटे… सिर्फ उनकी मौत की खबर आई।
और सबसे बड़ा सवाल—
जो आदमी खुद मेहनत करके पूरे परिवार का सहारा था, उसके जाने के बाद उन तीन मासूम बच्चों का सहारा अब कौन बनेगा?
क्योंकि सच यही है—
आम आदमी की ज़िंदगी भी गुमनाम होती है… और मौत भी गुमनामी के अंधेरे में खो जाती है।

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