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छपरा ने वीर चक्र शहीद को किया सलाम 🇮🇳 ऑपरेशन सिंदूर के वीर को भावभीनी श्रद्धांजलि

“कुछ नाम सिर्फ नाम नहीं होते… वो सरहद की मिट्टी में लिखा हुआ भरोसा होते हैं। कुछ चेहरे सिर्फ तस्वीर नहीं होते… वो उस तिरंगे की कीमत बताते हैं, जो हमारी छतों पर बेफिक्र लहराता है…”

छपरा के भिखारी ठाकुर प्रेक्षागृह में आज एक ऐसा पल था, जहां आंखें भी नम थीं और सीना भी गर्व से चौड़ा। मौका था ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए, वीर चक्र से सम्मानित BSF के जांबाज़ सब इंस्पेक्टर स्वर्गीय मोहम्मद इम्तियाज़ के प्रथम शहादत दिवस का।

वो ऑपरेशन सिंदूर… जिसने देश को यह याद दिलाया कि सरहदें सिर्फ नक्शों से सुरक्षित नहीं होतीं, बल्कि उन जवानों के जज्बे से बची रहती हैं, जो अपनी सांसों से पहले देश का नाम लेते हैं। उसी ऑपरेशन में मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूत मोहम्मद इम्तियाज़ को आज छपरा ने झुककर सलाम किया।
भिखारी ठाकुर प्रेक्षागृह का माहौल आज किसी साधारण सरकारी कार्यक्रम जैसा नहीं था… यहां भावनाएं थीं, सम्मान था और एक शहीद के प्रति पूरे समाज की कृतज्ञता थी। सीमा सुरक्षा बल यानी BSF और सारण प्रशासन ने मिलकर इस श्रद्धांजलि समारोह को एक यादगार आयोजन में बदल दिया।
कार्यक्रम में बिहार सरकार के मंत्री जमा खान, सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, BSF के वरीय अधिकारी, सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव, एसपी विनीत कुमार समेत कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। सबने एक स्वर में उस वीर बेटे को नमन किया, जिसने देश की सुरक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
लेकिन इस कार्यक्रम की सबसे भावुक तस्वीर तब सामने आई… जब छपरा के छोटे-छोटे बच्चों ने ऑपरेशन सिंदूर की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। नन्हे कदमों से जब देशभक्ति मंच पर उतरी, तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। ऐसा लगा जैसे नई पीढ़ी अपने वीरों की कहानी खुद याद रखना चाहती हो।

और फिर वो पल… जिसने हर आंख को नम कर दिया। जब शहीद मोहम्मद इम्तियाज़ की पत्नी और बच्चे मंच पर मौजूद थे। चेहरों पर गर्व भी था… और अपनों को खोने का वो दर्द भी, जिसे शब्द शायद कभी पूरा बयान नहीं कर सकते। पूरा सभागार भावुक हो उठा।
आज छपरा ने सिर्फ एक शहीद को श्रद्धांजलि नहीं दी… बल्कि यह संदेश भी दिया कि जो देश के लिए शहीद होते हैं, वो कभी भुलाए नहीं जाते।
क्योंकि शहीद मरते नहीं… वो हर सलामी, हर तिरंगे और हर हिंदुस्तानी की सांस में जिंदा रहते हैं।
“भारत माता की जय”… और वीर शहीद मोहम्मद इम्तियाज़ अमर रहें। 🇮🇳

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