छपरा शहर की एक सड़क… राहत रोड।
जहां लोग रोज़मर्रा का सामान खरीदने जाते हैं। लेकिन इस बार एक दुकान पर सामान नहीं, बल्कि खून बहा।
कहानी शुरू होती है एक मामूली विवाद से। आरोप है कि एक ग्राहक को दुकानदार के बेटे ने अपशब्द कह दिए। बात बढ़ी, बहस हुई, फिर हाथापाई शुरू हो गई। और देखते ही देखते मामला इतना हिंसक हो गया कि चाकू निकल आया।
नतीजा—तीन युवक घायल हैं। एक किशोर, जो आरा का रहने वाला है और छपरा में रहकर गोलगप्पा बेचता है। उसके दो दोस्त भी अस्पताल में भर्ती हैं। तीनों का इलाज छपरा सदर अस्पताल में चल रहा है।

अब सवाल यह है कि क्या एक छोटे से विवाद का अंत चाकूबाजी में होना चाहिए? क्या हमारे शहरों में गुस्सा इतना सस्ता और इंसान की जान इतनी महंगी हो गई है कि कहासुनी के बाद सीधे हथियार निकलने लगें?
पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि समाज के उस बढ़ते आक्रोश की तस्वीर भी है, जहां संवाद की जगह हिंसा लेती जा रही है।
छपरा की इस घटना में आखिर सच क्या है, किसकी गलती है और चाकू किस परिस्थिति में चला—यह जांच का विषय है। लेकिन इतना तय है कि एक मामूली विवाद ने तीन युवकों को अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचा दिया।

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