यह दृश्य विचलित कर सकता है…
क्योंकि यहां सिर्फ गाड़ियां नहीं टकराईं, यहां एक परिवार की पूरी दुनिया बिखर गई है।
सड़क पर पड़ा टोटो, चारों तरफ चीख-पुकार, रोते हुए परिजन और खून से सना वह मंजर… जिसे देखकर किसी का भी दिल कांप जाए।
सारण जिले के छपरा-मुजफ्फरपुर एनएच-722 पर सोनहो टोल प्लाजा के पास रविवार की दोपहर मौत ने ऐसा तांडव मचाया कि देखते ही देखते खुशियों से भरा एक परिवार मातम में बदल गया।
अमनौर थाना क्षेत्र के सुल्तानगंज गांव निवासी फारूक मियां अपने परिवार के साथ इलाज कराकर घर लौट रहे थे। साथ में उनकी पतोहू शना खातून और परिवार के अन्य सदस्य भी थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि घर पहुंचने से पहले ही यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मकेर की ओर से छपरा जा रही एक तेज रफ्तार 18 चक्का हाइवा अचानक अनियंत्रित हो गई और सामने से आ रहे टोटो में भीषण टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी भयावह थी कि टोटो के परखच्चे उड़ गए।
इस दर्दनाक हादसे में फारूक मियां, उनकी पतोहू शना खातून समेत कुल चार लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में मासूम बच्चे भी शामिल हैं, जो अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
जिस परिवार ने सुबह घर से निकलते समय शायद शाम को वापस लौटने की उम्मीद की होगी, उस परिवार के कई सदस्य अब कभी वापस नहीं लौटेंगे।
हादसे के बाद हाइवा बिजली के पोल से जा टकराया। चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। पीछे रह गईं चीखें, आंसू और अपनों को खोने का दर्द।
घटना के बाद गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दी। एनएच-722 पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। पुलिस मौके पर पहुंची, लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जिन घरों के चिराग बुझ गए हों, उन्हें शब्दों से कैसे समझाया जा सकता है?
सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि हादसा कैसे हुआ।
सवाल यह भी है कि आखिर तेज रफ्तार का यह सिलसिला कब रुकेगा?
कब तक सड़कें लोगों को घर पहुंचाने के बजाय श्मशान और कब्रिस्तान तक पहुंचाती रहेंगी?
सोनहो टोल प्लाजा के पास आज सिर्फ चार लोगों की मौत नहीं हुई है…
आज एक परिवार का सहारा, उसकी खुशियां और उसके सपने भी सड़क पर दम तोड़ गए हैं।
और यह मंजर… शायद बहुत दिनों तक लोगों की आंखों से ओझल नहीं होगा।

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