नमस्कार…
सोनपुर का हरिहरनाथ मंदिर… पहलेजा घाट… और सावन की अंतिम सोमवारी। लाखों आस्थाएं जब एक जगह पहुंचती हैं, तब प्रशासन की परीक्षा भी शुरू हो जाती है।
सारण के जिला पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और वरीय पुलिस अधीक्षक आज खुद मैदान में उतरे। पहलेजा घाट का निरीक्षण किया। देखा कि जहां से श्रद्धालु गंगा जल भरेंगे, जहां स्नान करेंगे, जहां कपड़े बदलेंगे, वहां व्यवस्था कितनी तैयार है।
क्योंकि प्रशासन जानता है कि अंतिम सोमवारी केवल धार्मिक आयोजन नहीं होती, यह भीड़ प्रबंधन की सबसे बड़ी चुनौती भी होती है। एक छोटी सी चूक हजारों लोगों को परेशानी में डाल सकती है।
हरिहरनाथ मंदिर परिसर में भी अधिकारियों ने प्रवेश और निकास मार्गों का जायजा लिया। सवाल यही है कि श्रद्धालु दर्शन करने आएं तो उन्हें धक्का-मुक्की नहीं, सुविधा मिले। सुरक्षा मिले। व्यवस्था मिले।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।

इसी दौरे में जिला पदाधिकारी सबलपुर दियारा भी पहुंचे, जहां गंगा का कटाव लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। अधिकारियों को सैंडबैग और राहत तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके।
और फिर बारी आई सोनपुर अवर निबंधन कार्यालय की। जहां डीएम ने रजिस्ट्री और निबंधन प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने, पेपरलेस व्यवस्था को मजबूत करने और आम लोगों को बेहतर सुविधा देने पर जोर दिया।
यानी एक ही दिन में आस्था, प्रशासन और आमजन की सुविधा—तीनों पर फोकस दिखाई दिया।
अब निगाहें 24 अगस्त की अंतिम सोमवारी और 28 अगस्त को श्रावणी मेला के समापन दिवस पर रहेंगी, जब यह पता चलेगा कि कागजों पर बनी तैयारी जमीन पर कितनी सफल साबित होती है।
कैमरामैन के बिना, सवालों के साथ
.. ई-बिहार डिजिटल न्यूज़ के लिए, मैं संजीव मिश्रा।

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