eBiharDigitalNews

डिजिटल युग का डिजिटल समाचार

छपरा में बाढ़ का कहर: 4-5 फीट पानी में डूबे घर, बच्चों की जान पर खतरा | Ground Report

छपरा में बाढ़ का पानी नहीं, बेबसी तैर रही है: दलिया रहीमपुर में 4-5 फीट पानी, घर बने टापू
छपरा। गंगा और सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर ने छपरा के दियारा इलाकों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। दलिया रहीमपुर क्षेत्र के अड्डा नंबर-2 में हालात ऐसे हैं कि कई घर चार से पांच फीट तक पानी से घिर गए हैं। करीब आधा किलोमीटर तक फैले इलाके में कई मकान पानी के बीच टापू की तरह दिखाई दे रहे हैं।
ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान सामने आई तस्वीरें सिर्फ बाढ़ की भयावहता नहीं दिखातीं, बल्कि उन परिवारों की बेबसी भी सामने लाती हैं, जिनका घर, सामान और रोजमर्रा की जिंदगी सब पानी के बीच फंस गई है।
घर डूबे, लेकिन जिंदगी बचाने की जद्दोजहद जारी
बाढ़ के पानी के बीच लोग अपने जरूरी सामान को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटे हैं। किसी के सिर पर घरेलू सामान है तो कोई अपने मवेशियों को लेकर ऊंचे स्थान की ओर जाता दिखाई देता है।
एक तस्वीर में एक व्यक्ति सिर पर पंखा रखकर पानी के बीच से निकलता नजर आता है। घर की दीवारें और छत पानी में घिर चुकी हैं, लेकिन पंखा उसके लिए आज भी जरूरी है। बाढ़ के बीच बचाया जा रहा हर सामान इन परिवारों के लिए बेहद कीमती है।

बच्चों के लिए बाढ़ का पानी बना खेल का मैदान
सबसे चिंताजनक तस्वीरें उन बच्चों की हैं, जो बाढ़ के पानी में खेलते और छलांग लगाते दिखाई दे रहे हैं। बच्चों के लिए यह पानी शायद खेल है, लेकिन अभिभावकों और प्रशासन के लिए यह गंभीर खतरे का विषय है।
बाढ़ के गहरे पानी में बच्चों की मौजूदगी हादसे की आशंका बढ़ाती है। ऐसे में सवाल है कि प्रभावित इलाकों में बच्चों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त निगरानी और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
प्रशासन की अपील के बीच सबसे बड़ा सवाल—लोग जाएं तो जाएं कहां?
प्रशासन की ओर से लोगों को ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है। लेकिन दियारा क्षेत्र के लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि वे जाएं तो जाएं कहां?
जिन परिवारों ने वर्षों से इसी जमीन पर अपना घर बनाया और जीवन गुजारा, उनके लिए अचानक घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाना आसान नहीं है। मवेशियों, घरेलू सामान और रोजी-रोटी की चिंता भी उनके सामने है।
हर साल बाढ़ आती है, सवाल भी छोड़ जाती है
बिहार में बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है। हर साल नदियों का जलस्तर बढ़ता है, दियारा और निचले इलाकों में पानी पहुंचता है और हजारों परिवार प्रभावित होते हैं।
सरकार और प्रशासन की ओर से राहत, बचाव और बाढ़ नियंत्रण को लेकर प्रयास किए जाते हैं। बावजूद इसके हर साल वही सवाल सामने खड़ा हो जाता है—आखिर स्थायी समाधान कब होगा?
दलिया रहीमपुर की तस्वीरें इस सवाल को फिर सामने ला रही हैं।
बाढ़ का पानी उतर जाएगा। घरों की दीवारें शायद फिर खड़ी हो जाएंगी। लेकिन जिन परिवारों ने इस पानी में अपना सामान, अपनी मेहनत और अपने सपने डूबते देखे हैं, उनके सवाल शायद इतनी आसानी से नहीं उतरेंगे।
ग्राउंड रिपोर्ट: संजीव मिश्रा
eBiharDigitalNews.com, छपरा

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *