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गंगा पुल पर खड़े युवक की आखिरी पुकार, सुनकर सन्न रह जाएंगे मां से माफी,

युवक की दर्द भरी दास्तान सुनते हुए एक पल के लिए ऐसा लगता है कि काश कोई उसके मोबाइल के उस पार मौजूद होता। काश कोई उसकी बात सुनकर उसे रोक लेता। काश कोई उसका हाथ पकड़ लेता और कहता—”ठहरो, यह रास्ता आख़िरी नहीं है।”
वीडियो में उसकी आवाज़ सिर्फ शब्द नहीं है, वह मदद की एक मौन पुकार भी लगती है। जब वह अपनी मां से माफी मांगता है, अपने भाई को बच्चों की जिम्मेदारी सौंपता है और अपने परिवार के प्रति अपना दर्द व्यक्त करता है, तब देखने वाला हर व्यक्ति यही सोचता है कि काश उस समय कोई उसके पास पहुंच जाता।

लेकिन जिंदगी की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि कई बार इंसान सबसे ज्यादा टूटता है, तब भी दुनिया को लगता है कि सब कुछ सामान्य है। उसके भीतर क्या चल रहा था, कितना दर्द था, कितनी बेचैनी थी, यह शायद वही जानता था।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि अपने आसपास के लोगों की बात सुनना कितना जरूरी है। कई बार किसी परेशान व्यक्ति को सलाह नहीं, सिर्फ एक सुनने वाला इंसान चाहिए होता है। शायद एक बातचीत, एक भरोसा, एक साथ खड़ा व्यक्ति किसी को ऐसा कदम उठाने से रोक सकता है।
हर जिंदगी अनमोल है। कोई भी परेशानी, चाहे कितनी बड़ी क्यों न लगे, जिंदगी से बड़ी नहीं होती।

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