सड़क पर निकला एक परिवार… अपने किसी सपने, किसी रिश्ते, किसी मंजिल की ओर बढ़ रहा था। लेकिन बिहार के सारण जिले के मढ़ौरा में एक तेज रफ्तार ट्रक ने उस सफर को हमेशा के लिए रोक दिया।
धेनुकी चौक पर हुए इस दर्दनाक हादसे में 35 वर्षीय सुंती देवी की मौत हो गई। वह अपने पति संटु साह और बच्चे के साथ बाइक से मायके जा रही थीं। शायद मायके पहुंचने की खुशी रही होगी, रास्ते भर कुछ बातें हुई होंगी, कुछ योजनाएं बनी होंगी। लेकिन एक पल में सब कुछ बदल गया।

ट्रक की चपेट में आने से सुंती देवी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। पति और बच्चा बच गए, लेकिन उनके सामने परिवार का एक अहम हिस्सा हमेशा के लिए छिन गया।
हादसे के बाद लोगों का गुस्सा सड़क पर उतर आया। धेनुकी चौक जाम कर दिया गया। मांग थी कि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा मिले। सवाल सिर्फ एक परिवार का नहीं है, सवाल उन सड़कों का भी है जहां आए दिन किसी की जिंदगी तेज रफ्तार और लापरवाही की भेंट चढ़ जाती है।
सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचे। लोगों को समझाया गया, आश्वासन दिया गया और जाम समाप्त कराया गया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त ट्रक और उसके चालक को अपने कब्जे में ले लिया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए छपरा सदर अस्पताल भेजा गया है।
लेकिन हर सड़क हादसे के बाद एक सवाल वहीं खड़ा रह जाता है— आखिर कब तक? कब तक किसी मां, बहन, पत्नी या बेटे की जिंदगी यूं ही सड़कों पर खत्म होती रहेगी? और कब तक हादसों के बाद मुआवजे की मांग ही न्याय का पहला रास्ता बनती रहेगी?
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है, लेकिन सुंती देवी के परिवार के लिए यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि जिंदगी भर का दर्द बन चुकी है।

![]()







Leave a Reply