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गज़ब है छपरा का नगर निगम!

आज नगर निगम दो हिस्सों में बंटा दिखाई दिया। एक तरफ विरोध करने वाले लोग हैं, दूसरी तरफ पक्ष वाले लोग।
विरोध करने वालों का कहना है कि सबसे ज्यादा लूट पक्ष वालों ने की है। वहीं पक्ष वालों का दावा है कि विरोध करने वालों ने इतना लूटा कि अब बजट तक पास नहीं होने देते।
अब सवाल ये है कि आखिर कौन कितना लूटा?
कौन किस पर आरोप लगा रहा है?
और किसके आरोपों में कितना दम है?

बैठक में विकास से ज्यादा चर्चा आरोपों की होती दिखाई दी। एक पक्ष दूसरे पर उंगली उठा रहा है, दूसरा पक्ष पहले पर सवाल खड़े कर रहा है।
लेकिन इस पूरे राजनीतिक घमासान के बीच छपरा की जनता सोच रही है कि आखिर उसका फायदा कब होगा?
क्योंकि नगर निगम का मतलब सड़क, नाली, सफाई और शहर का विकास होता है। लेकिन यहां बहस इस बात पर ज्यादा हो रही है कि किसने कितना लूटा और कौन किसे लुटेरा बता रहा है।
छपरा नगर निगम का यह नज़ारा अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
आखिर शहर के विकास की बात होगी या सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप का खेल चलता रहेगा?

फिलहाल नगर निगम के भीतर बहस गर्म है, आरोपों का दौर जारी है और जनता इंतज़ार कर रही है कि उसके हिस्से का विकास कब आएगा।”

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