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“छपरा… सारण… और दिनदहाड़े गोली…”

एक राजस्व कर्मचारी… अपना काम खत्म कर घर लौट रहा था। लेकिन घर पहुंचने से पहले ही रास्ते में गोलियां उसका इंतजार कर रही थीं।
सहाजितपुर थाना क्षेत्र के मोती छपरा पुल के पास अपराधियों ने असलम अंसारी को गोली मार दी। बताया जा रहा है कि वे राजस्व कर्मचारी के पद पर कार्यरत हैं। गोली उनके कंधे में लगी… हालत बिगड़ी… और डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया।

लेकिन सवाल सिर्फ असलम अंसारी का नहीं है…
सवाल यह है कि आखिर हमारे समाज में हो क्या रहा है? दिनदहाड़े गोली चलती है… अपराधी आते हैं और निकल जाते हैं। क्या अब कानून का डर खत्म हो चुका है? क्या अपराध करना इतना आसान हो गया है?
आखिर इंसान इस हद तक क्यों पहुंच रहा है कि किसी की जान लेने या जान से खेलने में एक पल भी नहीं सोच रहा? समाज का ताना-बाना इस तरह कमजोर क्यों पड़ रहा है? क्या इसकी वजह बेरोजगारी है, निजी रंजिश है, लालच है या फिर कानून व्यवस्था पर कमजोर होता भरोसा?

हर घटना के बाद पुलिस जांच करती है… सरकारें बयान देती हैं… लेकिन आम आदमी के मन में एक सवाल रह जाता है — क्या अब सुरक्षित घर लौटना भी भरोसे की नहीं, किस्मत की बात हो गई है?
छपरा में गोली असलम अंसारी को लगी है… लेकिन सवालों के घेरे में पूरी व्यवस्था खड़ी है।

 

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