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छात्रों की आवाज़ सत्ता तक पहुंची, शिक्षकों की पुकार कौन सुनेगा?

50 हजार शिक्षकों की चुप्पी, क्या कोई सुनेगा?
छपरा, नगरपालिका चौक।
अभी कुछ दिन पहले बिहार ने छात्रों का उग्र आंदोलन देखा। सड़कों पर भीड़ थी, नारे थे, गुस्सा था। सरकार को झुकना पड़ा, फैसले लेने पड़े। लेकिन सोमवार को छपरा के नगरपालिका चौक पर जो दृश्य था, वह बिल्कुल अलग था।
यहां न कोई हंगामा था, न कोई टकराव। यहां बैठे थे वित्त रहित शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी। वे लोग, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी शिक्षा को दी, लेकिन बदले में आज भी सम्मानजनक वेतन, पेंशन और सेवा सुरक्षा का इंतजार कर रहे हैं।
बिहार के करीब 50 हजार वित्त रहित शिक्षक वर्षों से एक ही मांग दोहरा रहे हैं—वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त हो, नियमित वेतन मिले, पेंशन मिले और सेवा सुरक्षा की गारंटी हो। लेकिन सरकारें बदलती रहीं, आश्वासन बदलते रहे, फाइलें आगे-पीछे होती रहीं, पर शिक्षकों की जिंदगी नहीं बदली।
धरना दे रहे शिक्षकों का कहना है कि जब सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का विस्तार नहीं हुआ था, तब इन्हीं वित्त रहित संस्थानों ने गांव-गांव में उच्च शिक्षा पहुंचाई। लाखों छात्रों को पढ़ाया। इन्हीं कॉलेजों से पढ़कर निकले युवा आज प्रशासनिक सेवा, न्यायपालिका, चिकित्सा, शिक्षा और सेना में देश की सेवा कर रहे हैं।

विडंबना यह है कि जिन शिक्षकों ने दूसरों का भविष्य बनाया, उनका अपना भविष्य आज भी असुरक्षित है।
मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में शिक्षकों ने नियमित वेतनमान, पेंशन, बकाया अनुदान के भुगतान, PF, चिकित्सा सुविधा, कर्मचारी कल्याण कोष और वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त कर स्थायी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
धरने पर बैठे एक बुजुर्ग शिक्षक के चेहरे पर समय की लकीरें साफ दिखाई दे रही थीं। शायद वे भी कभी इसी उम्मीद में आंदोलन शुरू किए होंगे कि अगली सरकार कुछ करेगी। फिर दूसरी सरकार आई, फिर तीसरी। उम्मीदें बची रहीं, लेकिन समाधान नहीं आया।
ऐसे में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की पंक्तियां याद आती हैं—
“शक्ति नहीं तब तक, जब तक भाग न सबका सम हो,
नहीं किसी को बहुत अधिक हो, नहीं किसी को कम हो।
और शायद आज इन शिक्षकों की पीड़ा को सबसे बेहतर तरीके से यही पंक्ति बयान करती है—
“समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध,
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध।
सवाल सिर्फ 50 हजार शिक्षकों का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है जो शिक्षा को विकास का आधार तो मानती है, लेकिन शिक्षकों के जीवन को अब तक स्थिर आधार नहीं दे पाई।
आज छपरा के नगरपालिका चौक पर धरना था। शांत धरना। लेकिन उस खामोशी में हजारों परिवारों की उम्मीदें, संघर्ष और अधूरे वादों की कहानी साफ सुनाई दे रही थी

एकदिवसीय धरना कार्यक्रम की अध्यक्षता वीरेंद्र सिंह, अतुल तिवारी और कांग्रेस जिला अध्यक्ष शंकर चौधरी ने संयुक्त रूप से और इसका डॉक्टर यादव किया … और इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉक्टर सुमित्रा यादव, प्रोफेसर शिवकुमार पाठक ,प्रोफेसर अरुण कुमार, प्रिंसिपल संजय सिंह तथा अन्य शिक्षक कर्मी शामिल रहे।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कांग्रेस सेवा दल के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर संजय कुमार यादव शामिल थे

कार्यक्रम की संचालन प्रोफेसर भूपेंद्र कुमार ने किया 

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