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1530 खाताधारकों को नोटिस, 5–7 करोड़ के सेटलमेंट का लक्ष्य

कभी-कभी किसी परिवार के लिए बैंक का एक नोटिस सिर्फ एक कागज नहीं होता…
उसके पीछे होती है चिंता, कर्ज का बोझ और इस सवाल की बेचैनी कि अब आगे क्या होगा?
लेकिन आज राष्ट्रीय लोक अदालत ने ऐसे ही कई खाताधारकों के लिए समझौते का एक रास्ता खोलने की कोशिश की है।
सारण जिले में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक ऑफ इंडिया की करीब 12 शाखाओं ने भागीदारी की है। बैंक के सीनियर ब्रांच मैनेजर अमित कुमार ओझा के अनुसार, जिले में बैंक ऑफ इंडिया से जुड़े करीब 1,530 खाताधारक ऐसे हैं, जिन्हें नोटिस के माध्यम से राष्ट्रीय लोक अदालत में आने और अपने मामले के समाधान की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए सूचित किया गया है।
अमित कुमार ओझा के मुताबिक, जिले में बैंक ऑफ इंडिया का करीब 20 करोड़ रुपये का NPA है।
बैंक की कोशिश है कि विभिन्न योजनाओं और समझौते के माध्यम से अधिक से अधिक मामलों का सेटलमेंट किया जा सके।
बैंक अधिकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया के जरिए करीब 5 से 7 करोड़ रुपये तक के सेटलमेंट का लक्ष्य रखा गया है।

दोपहर 12 बजे तक करीब 24 से 25 आवेदन बैंक के पास पहुंच चुके थे, जिनमें सेटलमेंट को लेकर बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी।
यानी बात सिर्फ आंकड़ों की नहीं है…
एक तरफ बैंक के लिए यह NPA कम करने और लंबित खातों के समाधान की कोशिश है, तो दूसरी तरफ उन खाताधारकों के लिए यह मौका है, जो लंबे समय से अपने कर्ज और बैंकिंग मामले के समाधान का रास्ता तलाश रहे हैं।
अब देखना होगा कि राष्ट्रीय लोक अदालत के खत्म होने तक कितने मामलों में वास्तव में समझौता हो पाता है और कितने लोगों को इस पहल का सीधा लाभ मिलता है।
बैंक ऑफ इंडिया की यह पहल सारण में राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्देश्य—आपसी सहमति से मामलों के त्वरित समाधान—की दिशा में एक महत्वपूर्ण कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
यह रिपोर्ट बैंक ऑफ इंडिया के सीनियर ब्रांच मैनेजर अमित कुमार ओझा द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित है।

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