अब बैंककर्मी भी सड़कों पर हैं।
देश की अर्थव्यवस्था की धड़कन माने जाने वाले बैंकों में आज ताले लटके हैं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर देशभर के लाखों बैंक कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल पर उतर आए हैं। बैंक यूनियनों का दावा है कि करीब 8 से 9 लाख कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हैं।
बैंककर्मियों का कहना है कि उनकी मांगें नई नहीं हैं। वर्षों से वे पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था, समान PLI (परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव), लंबित द्विपक्षीय समझौतों के क्रियान्वयन, आउटसोर्सिंग और कॉन्ट्रैक्ट भर्ती पर रोक तथा बैंक बोर्डों में खाली पदों को भरने की मांग कर रहे हैं। यूनियनों का आरोप है कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इन मांगों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही हैं।

इस हड़ताल का असर देशभर की बैंक शाखाओं में दिखाई दे रहा है। नकद जमा-निकासी, चेक क्लियरेंस, पासबुक अपडेट और कई शाखा-आधारित सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि UPI, ATM, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहने की उम्मीद है।
बैंक यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो सितंबर के अंत में बड़े आंदोलन और आगे चलकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता भी अपनाया जा सकता है।
सवाल सिर्फ बैंक कर्मचारियों का नहीं है। सवाल यह भी है कि जब देश डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब बैंकिंग व्यवस्था को संभालने वाले कर्मचारी आखिर किन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। सरकार और यूनियनों के बीच यह टकराव कब खत्म होगा, इसका इंतजार अब बैंककर्मियों के साथ-साथ करोड़ों ग्राहकों को भी है।

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