छपरा आखिर इतना खामोश क्यों है?
कल एक दोहरे हत्याकांड के चश्मदीद गवाह को अपराधियों ने गोली मार दी। सवाल यह नहीं है कि हत्या हुई। बिहार में हत्या अब खबर कम और आंकड़ा ज्यादा बनती जा रही है। सवाल यह है कि एक ही परिवार में लगातार मौतें होती रहीं, गोलियां चलती रहीं, और समाज चुप रहा।
आज सांसद Pappu Yadav छपरा पहुंचे। उन्होंने गुस्से में कहा कि “छपरा से ज्यादा कायर जगह कहीं नहीं देखी।” यह बयान सिर्फ एक शहर पर हमला नहीं है, बल्कि उस खामोशी पर सवाल है जो हर गोली के बाद और गहरी होती जा रही है।

पप्पू यादव ने पूछा कि एक ही घर में पांच-पांच हत्याएं हो जाएं, गवाहों को मार दिया जाए, और फिर भी जनप्रतिनिधियों की आवाज न सुनाई दे, तो जनता आखिर किसके भरोसे रहे? हाल ही में दोहरे हत्याकांड के एक प्रमुख गवाह की हत्या ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सवाल सिर्फ अपराधियों का नहीं है। सवाल उन नेताओं का भी है जो घटना के बाद बयान देते हैं, लेकिन डर के माहौल पर चुप रहते हैं। सवाल प्रशासन का भी है कि गवाह सुरक्षित नहीं हैं तो न्याय कैसे होगा

छपरा की जनता को भी यह तय करना होगा कि वह खबर बनेगी या इतिहास लिखेगी। क्योंकि अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत उनकी बंदूक नहीं, समाज की चुप्पी होती है।

![]()


Leave a Reply