सारण में आज भ्रष्टाचार के खिलाफ शपथ ली गई। मंच पर जिले के बड़े अधिकारी मौजूद थे। सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव, वरीय पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार और अन्य अधिकारियों ने यह संकल्प दोहराया कि न तो भ्रष्टाचार करेंगे और न ही उसे बढ़ावा देंगे।
सवाल यह नहीं है कि शपथ ली गई। सवाल यह है कि शपथ का असर दफ्तरों की फाइलों तक कब पहुंचेगा? आम आदमी के लिए भ्रष्टाचार कोई भाषण का विषय नहीं, बल्कि रोजमर्रा की परेशानी है। कहीं प्रमाण पत्र के लिए चक्कर, कहीं किसी योजना का लाभ पाने के लिए इंतजार, तो कहीं छोटे-छोटे कामों में अनावश्यक बाधाएं।

फिर भी ऐसे आयोजनों का महत्व है। कम से कम व्यवस्था यह स्वीकार तो करती है कि भ्रष्टाचार एक समस्या है और उसके खिलाफ सार्वजनिक रूप से खड़ा होना जरूरी है। बिहार सतर्कता जागरूकता दिवस के अवसर पर लिया गया यह संकल्प तभी सार्थक होगा जब इसकी गूंज सभागार की दीवारों से निकलकर सरकारी कार्यालयों के व्यवहार में दिखाई दे।
क्योंकि भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ी शपथ शब्दों से नहीं, काम से पूरी होती है। और जनता उसी दिन भरोसा करेगी, जब उसे अपने अधिकार के लिए किसी सिफारिश, किसी दलाल और किसी अतिरिक्त कीमत की जरूरत नहीं पड़ेगी।


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