मकेर में गंडक का कहर: बाघाकोल और हैज़लपुर में मुख्य बांध ध्वस्त, DM-SP मौके पर
सारण: नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर उत्तर बिहार में चिंता बढ़ा दी है। सारण जिले के मकेर प्रखंड के बाघाकोल और हैज़लपुर में मुख्य बांध ध्वस्त होने की सूचना है। इसके बाद जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है।
बांध ध्वस्त होने की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रभावित क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्य को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
सिर्फ राहत नहीं, स्थायी समाधान का सवाल
हर साल बाढ़ के दौरान प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य शुरू किया जाता है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाता है और राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन सवाल यह है कि हर साल वही स्थिति क्यों दोहराई जाती है?

सारण के साथ-साथ गोपालगंज और चंपारण के कई इलाकों में भी बाढ़ का संकट बना हुआ है। नेपाल से आने वाला पानी बिहार के मैदानी इलाकों में पहुंचकर बड़ी आबादी और खेती को प्रभावित करता है।
जिस पानी से तबाही, वही सिंचाई का साधन क्यों नहीं?
बिहार में एक तरफ बाढ़ के पानी से तबाही होती है, वहीं दूसरी तरफ कई इलाकों में किसान सिंचाई के पानी के लिए परेशान रहते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बाढ़ के अतिरिक्त पानी के वैज्ञानिक प्रबंधन, जल-संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को जोड़कर कोई दीर्घकालिक मास्टर प्लान तैयार किया जा सकता है?
बाढ़ आने पर राहत जरूरी है, लेकिन स्थायी समाधान की जरूरत उससे भी बड़ी है।
मकेर में टूटा बांध एक बार फिर यही सवाल छोड़ गया है—नेपाल का पानी, बिहार का दर्द… आखिर हर साल हम ही क्यों डूबते हैं?
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