रिपोर्ट: संजीव मिश्रा | eBiharDigitalNews.com
छपरा में एक हादसा हुआ है। हादसा—जो सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं है, बल्कि हमारी व्यवस्था, हमारी लापरवाही और हमारे समाज के उस हिस्से की कहानी है, जो रात भर दूसरों का मनोरंजन करता है और सुबह खुद जिंदगी से हार जाता है।
छपरा ब्रह्मपुर से बलिया जा रही एक पिकअप वैन, पीएन सिंह कॉलेज के आगे एक स्पीड ब्रेकर पर अनियंत्रित होकर पलट जाती है। वजह वही पुरानी—तेज रफ्तार, थकान और एक ऐसी गाड़ी जिसमें इंसानों को सामान की तरह ढोया जा रहा था।

इस पिकअप में आर्केस्ट्रा के कलाकार थे। रात भर नाच-गाना कर कमाई की, और सुबह जल्दी घर लौटने की हड़बड़ी। लेकिन इस जल्दी ने चार जिंदगियां छीन लीं।
गाड़ी खुली थी। पीछे बैठे लोग—कोई साउंड बॉक्स पर, कोई किनारे—जैसे ही पिकअप पलटी, करीब 8–9 लोग सड़क पर गिर पड़े। और तभी सामने से आती एक ट्रक… उन्हें कुचलते हुए निकल जाती है।
ट्रक रुकती नहीं। शायद उसे जल्दी थी… या शायद उसे आदत थी।
ड्राइवर और नाच पार्टी का मालिक—अशोक—मौके से फरार हो जाते हैं। पीछे छूट जाते हैं घायल, चीखें और एक पांच साल का बच्चा… जो अपनी मां को ढूंढ रहा है।

उसे नहीं पता कि उसकी मां अब कभी नहीं मिलेगी।
पुलिस आती है, घायलों को अस्पताल पहुंचाया जाता है। एसएसपी विनीत कुमार और एएसपी रामकुमार सिंह अस्पताल पहुंचते हैं, हाल जानते हैं। दो लोग पटना रेफर किए जाते हैं। बाकी छपरा में इलाज करा रहे हैं।
लेकिन सवाल यहीं खत्म नहीं होते।
सवाल यह है कि—
खुली पिकअप में इंसानों को ले जाने की इजाजत किसने दी?
रात भर काम करने के बाद थके ड्राइवर से गाड़ी क्यों चलवाई गई?
और हर हादसे के बाद भाग जाने वाले लोग… क्या कभी पकड़े जाते हैं?
मृतक:
अवधेश ग्वाल (हरदोई)
सोनी देवी (हरदोई)
राहुल कुमार (20 वर्ष, बलिया)
एक अन्य
घायल:
दिलीप कुमार राम (30 वर्ष)
शिवम यादव (5 वर्ष)
श्यामवीर (40 वर्ष)
संगीता देवी (35 वर्ष, एटा)
मनोज कुमार (36 वर्ष)
प्रीति देवी (26 वर्ष, हरदोई)
ये सिर्फ नाम नहीं हैं। ये वो लोग हैं जो खबर बन गए।
कल तक ये भी किसी के घर का हिस्सा थे—आज एक आंकड़ा हैं।
और हम…
हम अगली खबर का इंतजार कर रहे हैं।

![]()










Leave a Reply