आपने “सन ऑफ मल्लाह” सुना होगा, “सन ऑफ बिहार” भी सुना होगा...
लेकिन आज मिलिए सारण के उन युवाओं से, जो खुद को कहते हैं — “सन ऑफ नट”।
सारण की भीषण बाढ़ ने 4 लाख 60 हजार से अधिक लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया है। गांव डूबे हैं, घर उजड़े हैं, लोगों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा है।
ऐसे मुश्किल समय में नट समाज के कुछ जागरूक युवा अपने समाज और दलित बस्तियों के लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं। कोई भोजन पहुंचा रहा है, कोई आर्थिक सहयोग कर रहा है, तो कोई श्रमदान करके बाढ़ पीड़ितों का सहारा बन रहा है।

जहां एक ओर सरकार के सामुदायिक किचन चल रहे हैं, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के भंडारे चल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इन युवाओं का अपने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने समाज के लोगों के लिए खड़ा होना एक मिसाल बनकर उभर रहा है।
यह सिर्फ राहत का काम नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का एक संदेश भी है।
आइए सुनते हैं, “सन ऑफ नट” के ये युवा क्या कहते हैं और किस सोच के साथ बाढ़ पीड़ितों की मदद में जुटे हैं।

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