कहते हैं, कुछ कहानियां किताबों में नहीं लिखी जातीं।
उन्हें नदियां लिखती हैं… पानी लिखता है… और कभी-कभी एक टूटा हुआ बांध लिख देता है।
सारण की बाढ़ त्रासदी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
मैं संजीव मिश्रा हूं, और आप देख रहे हैं eBihar DigitalNews।
गंडक नदी पर बना हैजलपुर बांध… एक ऐसा बांध, जिसे लोग मजबूत मानते थे। लंबा तटबंध, चौड़ी सुरक्षा परतें और ऐसी संरचना, जिसे देखकर आम लोगों को लगता था कि इसे तोड़ पाना पानी के लिए भी आसान नहीं होगा।
लेकिन प्रकृति और लापरवाही की कहानी जब एक साथ लिखी जाती है, तो तस्वीर बदल जाती है।
फिर एक दिन, हैजलपुर बांध का एक हिस्सा टूट गया।
सिर्फ दरार नहीं आई… बल्कि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लगभग 150 से 200 मीटर तक तटबंध बह गया। और यहीं से शुरू हुई सारण की उस त्रासदी की कहानी, जिसे लोग शायद वर्षों तक नहीं भूल पाएंगे।

प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि बांध टूटने के बाद कुछ ही मिनटों में हालात बदल गए। पानी का ऐसा दबाव था कि सामने खड़ा एक दोमंजिला मकान भी तिनके की तरह बिखर गया। लोग संभल पाते, उससे पहले पानी गांवों की ओर दौड़ पड़ा।
मकेर से लेकर अमनौर तक… खेत, खलिहान, सड़कें, घर और सपने… सब पानी की चपेट में आने लगे।
एक गांव डूबा… फिर दूसरा… फिर तीसरा…
और देखते ही देखते हजारों परिवार बाढ़ के घेरे में आ गए।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग साढ़े चार लाख लोग इस आपदा से प्रभावित हुए। 10 से 12 लोगों की मौत की पुष्टि हुई। कई मवेशियों की जान गई। कुछ लोगों के अब भी लापता होने की बातें स्थानीय स्तर पर सुनाई देती हैं।
खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं। सड़कें टूट गईं। रोजगार ठहर गया। और कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सड़कों के किनारे शरण लेनी पड़ी।
आज पानी धीरे-धीरे लौट रहा है।
लेकिन अपने पीछे छोड़ गया है टूटी हुई दीवारें, उजड़े हुए आशियाने और वह डर… जो अब भी लोगों के दिलों में जिंदा है।
हैजलपुर बांध का टूटा हिस्सा आज भी लोगों को उस दिन की याद दिलाता है, जब पानी सिर्फ नदी में नहीं था, बल्कि लोगों की जिंदगी में उतर आया था।
अब प्रभावित परिवार सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। लोग चाहते हैं कि नुकसान का सही आकलन हो, राहत मिले और टूटे हुए बांध की जल्द से जल्द स्थायी मरम्मत हो, ताकि आने वाले वर्षों में यह भय फिर किसी गांव की किस्मत न लिखे।
सारण की इस बाढ़ ने सिर्फ घर और खेत नहीं छीने हैं।
इसने लोगों के भीतर एक सवाल भी छोड़ दिया है—
क्या इस त्रासदी से सबक लिया जाएगा, या अगली बरसात फिर किसी नए गांव की कहानी लिखेगी?
कैमरे के पीछे की तस्वीरें बदल जाएंगी, पानी भी उतर जाएगा, लेकिन हैजलपुर बांध से निकली यह बाढ़ और उससे जुड़ा दर्द, सारण के लोगों के जेहन में शायद बहुत लंबे समय तक जिंदा रहेगा।

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